शहर में ऑटो चालकों की मनमानी, नियमों की उड़ रही धज्जियां; प्रशासन की बैठकें बनीं महज खानापूर्ति धड़ल्ले से दौड़ रहे कई अनफिट ऑटो, बोलने की सभ्यता तक नहीं
By Shubh Bhaskar ·
16 Jul 2026 ·
31 views
शहर में ऑटो चालकों की मनमानी, नियमों की उड़ रही धज्जियां; प्रशासन की बैठकें बनीं महज खानापूर्ति
धड़ल्ले से दौड़ रहे कई अनफिट ऑटो, बोलने की सभ्यता तक नहीं
शाहपुरा (भीलवाड़ा)-राजेन्द्र खटीक।
भीलवाड़ा-कहने को तो भीलवाड़ा शहर का दर्जा बढ़कर 'नगर परिषद' से 'नगर निगम' हो चुका है, और टेक्स्टाइल सीटी की सूरत बदलने के भी बड़े-बड़े दावे किए जा रहे हैं, लेकिन यहां ज़मीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। शहर के विभिन्न मार्गो पर दौड रहे ऑटो के चालक कानून और अनुशासन की धज्जियां उड़ाने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं। भीलवाड़ा नगर निगम बनने के बावजूद, यहां के टेंपो चालकों की 'आजादी' ऐसी है कि उन्हें ना तो नियमों की परवाह है और ना ही प्रशासन का कोई खौफ। शहर की सड़कों पर इन दिनों यातायात नियमों का खुलेआम उल्लंघन हो रहा है। विभिन्न मार्गों पर ऑटो चालक न केवल बिना यूनिफॉर्म के धड़ल्ले से वाहन दौड़ा रहे हैं, बल्कि नियमों को ताक पर रखकर यातायात व्यवस्था को चुनौती दे रहे हैं। हैरानी की बात यह है कि इन ऑटो चालकों को रोकने-टोकने वाला कोई नहीं है, जिससे आमजन की सुरक्षा पर भी सवालिया निशान खड़े हो गए हैं।
बैठकों में प्रशासन के निर्देश बैअसर
सूत्रों के अनुसार, जिला प्रशासन, यातायात विभाग और जिला परिवहन विभाग की टेंपो यूनियन के साथ कई बार बैठकें हो चुकी हैं। इन बैठकों में ऑटो चालकों के लिए यूनिफॉर्म अनिवार्य करने के सख्त निर्देश दिए गए थे, लेकिन धरातल पर स्थिति जस की तस बनी हुई है। प्रशासन के आदेश केवल फाइलों और मीटिंग हॉल तक ही सीमित होकर रह गए हैं, जिसका सीधा खामियाजा शहर की यातायात व्यवस्था को भुगतना पड़ रहा है।
अनफिट ऑटो और कागजातों का अभाव
शहर की सड़कों पर दौड़ रहे कई ऑटो की स्थिति बेहद खस्ताहाल है। इनमें से अधिकांश ऑटो 'अनफिट' श्रेणी में आते हैं, जो न केवल प्रदूषण फैला रहे हैं बल्कि दुर्घटनाओं को भी आमंत्रण दे रहे हैं। इसके बावजूद, चेकिंग के दौरान अधिकतर चालकों के पास वाहन से संबंधित पर्याप्त दस्तावेज तक उपलब्ध नहीं होते। वहीं लगातार हो रही बैठकों के बाद भी नियमों का पालन नहीं होना, संबंधित विभागों की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है। शहरवासियों का कहना है कि प्रशासन और परिवहन विभाग की ओर से की जाने वाली बैठकें अब महज 'खानापूर्ति' बनकर रह गई हैं। यदि समय रहते इन पर लगाम नहीं कसी गई, तो शहर में यातायात व्यवस्था और भी बदतर हो सकती है। कई बार सवारियां बैठाने के चक्कर में ये झगड़ालू प्रवृत्ति के चालक अक्सर अभद्र भाषा का प्रयोग करते हैं और यातायात नियमों की धज्जियां उड़ाते हैं। ऊपर से इनका यह 'अशिष्ट पहनावा' आम जनता, खासकर महिलाओं और छात्राओं के लिए असहज स्थिति पैदा करता है। वहीं जिला प्रशासन वर्षों बाद भी ऑटो चालकों के वर्दी लागु क्यों नहीं करवा पाया, ये बड़ा सवाल है।