अलवर में पौधरोपण और पेयजल प्रबंधन पर उठे सवाल, खर्च और जवाबदेही पर चर्चा तेज।
By Shubh Bhaskar ·
14 Jul 2026 ·
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अलवर में पौधरोपण और पेयजल प्रबंधन पर उठे सवाल, खर्च और जवाबदेही पर चर्चा तेज।
*नागपाल शर्मा माचाड़ी की रिपोर्ट*
(माचाड़ीअलवर):-अलवर- अलवर में पौधरोपण अभियान और पेयजल आपूर्ति व्यवस्था को लेकर स्थानीय स्तर पर सवाल उठने लगे हैं। नागरिकों का कहना है कि पौधरोपण और पानी के टैंकरों पर लाखों रुपये खर्च किए जाने के बावजूद अपेक्षित परिणाम धरातल पर दिखाई नहीं दे रहे हैं। ऐसे में सरकारी धन के उपयोग और संबंधित विभागों की जवाबदेही को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
जानकारी के अनुसार वन विभाग की 'एक जिला, एक प्रजाति' सहित विभिन्न पौधरोपण योजनाओं के तहत बड़े पैमाने पर पौधे लगाए गए। अभियान के दौरान लक्ष्य पूरे होने के दावे भी किए गए, लेकिन कई स्थानों पर लगाए गए पौधे देखरेख और नियमित सिंचाई के अभाव में सूख चुके हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि पौधे लगाने के बाद उनके संरक्षण और रखरखाव पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया।
नागरिकों का सवाल है कि यदि पौधरोपण पर लाखों रुपये खर्च हुए हैं तो यह भी सार्वजनिक किया जाना चाहिए कि लगाए गए पौधों में कितने वर्तमान में जीवित हैं और उनकी निगरानी की क्या व्यवस्था की गई। लोगों का मानना है कि केवल पौधे लगाना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनका संरक्षण सुनिश्चित करना भी उतना ही आवश्यक है।
वहीं, गर्मी के मौसम में पेयजल संकट से निपटने के लिए शहर के विभिन्न क्षेत्रों में बोरिंग कराई गई और टैंकरों के माध्यम से पानी की आपूर्ति की गई। इस व्यवस्था को लेकर भी स्थानीय लोगों ने पारदर्शिता पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि कई बोरिंग बार-बार खराब होने की शिकायतें सामने आती हैं, जिससे मरम्मत और रखरखाव पर होने वाले खर्च को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
टैंकरों से जलापूर्ति को लेकर भी नागरिकों का कहना है कि जरूरतमंद क्षेत्रों तक नियमित और समान रूप से पानी पहुंचाने की व्यवस्था अधिक पारदर्शी होनी चाहिए। लोगों का मानना है कि यदि टैंकर संचालन और जल वितरण की निगरानी प्रभावी हो तो विवादों और शिकायतों की संभावना कम हो सकती है।
शहरवासियों का कहना है कि पर्यावरण संरक्षण केवल पौधरोपण तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि लगाए गए पौधों को जीवित रखना भी प्राथमिकता होनी चाहिए। इसी प्रकार पेयजल संकट का स्थायी समाधान केवल बोरिंग और टैंकरों की संख्या बढ़ाने से नहीं, बल्कि सुनियोजित और जवाबदेह व्यवस्था से संभव है।
स्थानीय नागरिकों ने संबंधित विभागों से पौधरोपण, बोरिंग और टैंकर संचालन पर हुए खर्च का विवरण सार्वजनिक करने, लगाए गए पौधों का सर्वे कराने तथा पेयजल आपूर्ति व्यवस्था में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की मांग की है।