अहंकार त्याग और निर्वैरता का संदेश देती है संत दादू दयाल जी महाराज की वाणी।
By Shubh Bhaskar ·
03 Jul 2026 ·
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अहंकार त्याग और निर्वैरता का संदेश देती है संत दादू दयाल जी महाराज की वाणी।
*नागपाल शर्मा माचाड़ी की रिपोर्ट*
(माचाड़ीअलवर):- राजगढ़- निर्गुण भक्ति परंपरा के महान संत दादू दयाल जी महाराज की वाणी आज भी समाज को सत्य, प्रेम और सद्भाव का मार्ग दिखा रही है। उनकी प्रसिद्ध साखी—
*“आपा मेटे हरि भजै, तन मन तजै विकार।*
*निर्वैरी सब जीव सूं, दादू यहु मत सार।।“*
मानव जीवन के मूल सिद्धांतों को सरल और सारगर्भित रूप में प्रस्तुत करती है।
संत दादू दयाल जी महाराज इस साखी के माध्यम से बताते हैं कि जो व्यक्ति अपने अहंकार का त्याग कर ईश्वर का भजन करता है तथा तन-मन के विकारों—काम, क्रोध, लोभ, मोह और ईर्ष्या—से स्वयं को मुक्त करता है,वही सच्चे आध्यात्मिक मार्ग पर अग्रसर होता है। साथ ही वे प्रत्येक जीव के प्रति निर्वैर भाव रखने का संदेश देते हैं। उनके अनुसार किसी से शत्रुता न रखना ही जीवन की श्रेष्ठ साधना है।
संत दादू दयाल का मानना था कि सच्ची भक्ति केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं होती,बल्कि वह शुद्ध आचरण, विनम्रता,आत्मसंयम और सभी प्राणियों के प्रति प्रेम एवं करुणा के भाव में निहित है। अहंकार रहित जीवन और सार्वभौमिक प्रेम ही ईश्वर प्राप्ति का सर्वोत्तम मार्ग है।
आज के सामाजिक परिवेश में भी संत दादू दयाल जी की यह शिक्षा आपसी भाईचारे,प्रेम, सद्भाव और मानवता के मूल्यों को मजबूत करने की प्रेरणा देती है।
ठिकाना गंगाबाग के महंत प्रकाश दास महाराज के उत्तराधिकारी उमाशंकर दास स्वामी ने बताया कि संत दादू दयाल जी महाराज की शिक्षाएं आज भी जनमानस के लिए उतनी ही प्रासंगिक हैं,जितनी उनके समय में थीं। उन्होंने कहा कि यदि प्रत्येक व्यक्ति उनके बताए आदर्शों को अपने जीवन में अपनाए तो समाज में प्रेम, शांति और सौहार्द का वातावरण स्थापित हो सकता है। श्रमजीवी पत्रकार संघ के तहसील उपाध्यक्ष व अन्य संगठनों के राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी नागपाल शर्मा माचाड़ी को यह जानकारी उमाशंकर दास स्वामी द्वारा प्रदान की गई।