राजस्थान में पेट्रोल पंपों पर बड़ा खुलासा, 110 पंपों पर कार्यवाही कम माप में पेट्रोल-डीजल देने का मामला, लाखों उपभोक्ताओं से हो रही थी ठगी।
By Shubh Bhaskar ·
21 May 2026 ·
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राजस्थान में पेट्रोल पंपों पर बड़ा खुलासा, 110 पंपों पर कार्यवाही
कम माप में पेट्रोल-डीजल देने का मामला, लाखों उपभोक्ताओं से हो रही थी ठगी।
*नागपाल शर्मा माचाड़ी की रिपोर्ट*
(माचाड़ीअलवर):- जयपुर- राजस्थान में पेट्रोल पंपों पर कम मात्रा में पेट्रोल-डीजल देने के बड़े खेल का खुलासा हुआ है। राज्य सरकार के विधिक माप विज्ञान विभाग द्वारा ०5 मई से 18 मई तक चलाए गए विशेष औचक निरीक्षण अभियान में 20 जिलों के 226 पेट्रोल पंपों की जांच की गई, जिसमें 110 पेट्रोल पंपों पर अनियमितताएं पाए जाने पर कार्यवाही की गई। विभाग ने दोषी पंप संचालकों से कुल ०2 लाख 21 हजार 500 रुपये का जुर्माना वसूला है।
विभाग की 23 जांच टीमों द्वारा की गई कार्यवाही में सामने आया कि कई पेट्रोल पंप उपभोक्ताओं को निर्धारित मात्रा से कम पेट्रोल और डीजल दे रहे थे। जांच के दौरान 60 पेट्रोल पंपों पर शॉर्ट डिलीवरी के मामले पाए गए, जहां प्रति ०5 लीटर ईंधन में 30 मिलीलीटर से लेकर 120 मिलीलीटर तक कम पेट्रोल-डीजल दिया जा रहा था। इन मामलों में 103 नोजल सीज किए गए तथा ०1 लाख 53 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया।
विभागीय अनुमान के अनुसार इन गड़बड़ियों के कारण उपभोक्ताओं को प्रतिदिन करीब 211 लीटर पेट्रोल-डीजल कम दिया जा रहा था, जिसकी अनुमानित कीमत लगभग 21 हजार 100 रुपये प्रतिदिन बैठती है। मासिक स्तर पर यह आंकड़ा ०6 हजार 357 लीटर और लगभग ०6 लाख 35 हजार 700 रुपये तक पहुंच रहा था।
कार्यवाही के दौरान जयपुर में ०3 पेट्रोल पंपों के 12 नोजल, नागौर में ०4 पंपों के 11 नोजल, बाड़मेर में ०6 पंपों के 10 नोजल तथा सिरोही में ०7 पंपों के ०9 नोजल सीज किए गए। इसके अलावा दौसा, भरतपुर,अलवर,जोधपुर,पाली, सीकर,अजमेर,भीलवाड़ा, जैसलमेर,बीकानेर,कोटा, उदयपुर,डूंगरपुर,झालावाड़, झुंझुनू और सवाई माधोपुर सहित कई जिलों में भी कार्यवाही की गई।
वहीं 72 पेट्रोल पंपों पर विधिक माप विज्ञान नियमों के उल्लंघन पाए गए। इनमें ०5 लीटर माप सत्यापित नहीं होना और सत्यापन प्रमाण पत्र प्रदर्शित नहीं करना प्रमुख रहा। इन मामलों में विभाग ने 68 हजार 500 रुपये का जुर्माना लगाया।
इस कार्यवाही के बाद प्रदेशभर में पेट्रोल पंपों की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो गए हैं। उपभोक्ताओं का कहना है कि लंबे समय से कम माप का यह खेल चल रहा था, जिससे लाखों लोगों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा। विभाग ने आगे भी नियमित जांच अभियान जारी रखने की बात कही है।