कोटा पुलिस का 'ऑपरेशन म्यूल हंटर': 4 करोड़ के अंतरराष्ट्रीय साइबर फ्रॉड का भंडाफोड़, झालावाड़ से मास्टरमाइंड और हरियाणा से दो शूटर नुमा ठग गिरफ्तार!
By Shubh Bhaskar ·
16 May 2026 ·
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दैनिक शुभ भास्कर
संवाददाता सुरेश कुमार पटेरिया
कोटा पुलिस का 'ऑपरेशन म्यूल हंटर': 4 करोड़ के अंतरराष्ट्रीय साइबर फ्रॉड का भंडाफोड़, झालावाड़ से मास्टरमाइंड और हरियाणा से दो शूटर नुमा ठग गिरफ्तार!
खास कार, फर्जी खाते और स्वाइप मशीनें: मेवात के नूंह से कोटा तक फैला था जाल, भोले-भाले लोगों के नाम पर खुलवाए थे 'म्यूल अकाउंट्स'
एसपी सुजीत शंकर के सुपरविजन में विशेष टीम की बड़ी सर्जिकल स्ट्राइक, नए बीएनएस कानून के तहत शिकंजा।
कोटा ग्रामीण पुलिस ने देशव्यापी साइबर ठगी के एक ऐसे बड़े सिंडिकेट को ध्वस्त कर दिया है, जिसके तार ₹4 करोड़ से अधिक के फ्रॉड से जुड़े हैं। एसपी सुजीत शंकर के निर्देश पर चलाई जा रही विशेष मुहिम 'ऑपरेशन म्यूल हंटर' के तहत पुलिस ने एक बड़े नेटवर्क को बेनकाब करते हुए गिरोह के मुख्य सूत्रधार (मास्टरमाइंड) शाहबिद खान उर्फ शाबिर को झालावाड़ से दबोचने में कामयाबी हासिल की है। इससे पहले पुलिस ने हरियाणा के नूंह (मेवात) से संचालित होने वाले दो शातिर बदमाशों को भारी मात्रा में नकदी और डिजिटल गैजेट्स के साथ दबोचा था।नाकाबंदी में फंसी संदिग्ध स्विफ्ट कार, खुला राजइस महा-ऑपरेशन की शुरुआत तब हुई जब कैथून और मण्डाणा थाना पुलिस ने मण्डाणा क्षेत्र में विशेष नाकाबंदी की थी। इसी दौरान हरियाणा नंबर (HR 28 M 2455) की एक संदिग्ध मारुति स्विफ्ट कार को जांच के लिए रोका गया। कार की तलाशी लेने पर पुलिस अधिकारियों के होश उड़ गए
कार सवार आरोपी जावेद (25) और मोहम्मद इरशाद (30) निवासी नूंह, हरियाणा के कब्जे से ₹1,71,000 की नगद राशि, दो पेटीएम पीओएस (POS) मशीनें, 4 एक्टिव मोबाइल फोन और विभिन्न बैंकों के 4 चालू डेबिट कार्ड बरामद किए गए।ऐसे चलता था फ्रॉड का पूरा 'गोरखधंधा'गिरफ्तार आरोपियों से जब पुलिस ने सख्ती से पूछताछ की, तो परत-दर-परत चौकाने वाले खुलासे हुए। यह गैंग देश के अलग-अलग हिस्सों में मासूम लोगों को पैसों का लालच देकर उनके नाम पर बैंक खाते खुलवाता था, जिन्हें तकनीकी भाषा में 'म्यूल अकाउंट्स' कहा जाता है। इन खातों और उनके डेबिट कार्ड को झालावाड़ का मास्टरमाइंड शाहबिद खान मैनेज करता था। देश में कहीं भी होने वाली साइबर ठगी की रकम को तुरंत इन खातों में डलवाया जाता था और फिर पीओएस मशीनों व एटीएम के जरिए पलक झपकते ही निकाल लिया जाता था।