कोटा पुलिस का महा-एक्शन: 'ऑपरेशन म्यूल हंटर' में देशव्यापी साइबर सिंडिकेट ध्वस्त, हॉस्टल से 3 दलाल गिरफ्तार।
By Shubh Bhaskar ·
15 May 2026 ·
26 views
दैनिक शुभ भास्कर
संवाददाता सुरेश कुमार पटेरिया
कोटा पुलिस का महा-एक्शन: 'ऑपरेशन म्यूल हंटर' में देशव्यापी साइबर सिंडिकेट ध्वस्त, हॉस्टल से 3 दलाल गिरफ्तार।
फ्रंट पेज ब्लास्ट: कोरल पार्क के SGN अपार्टमेंट में छापा; चंद रुपयों के लालच में देश को बेच रहे थे बैंक खाते, मोबाइल खंगालते ही उड़े पुलिस के होश!
कोटा शहर मे साइबर अपराधियों के डिजिटल साम्राज्य पर प्रहार करते हुए कोटा शहर पुलिस ने अब तक के सबसे बड़े और सनसनीखेज नेटवर्क का भंडाफोड़ किया है। जिला पुलिस अधीक्षक (SP) तेजस्वनी गौतम (IPS) के कड़े रुख और कुशल निर्देशन में चलाए गए 'ऑपरेशन म्यूल हंटर' के तहत बोरखेड़ा थाना पुलिस ने बड़ी सफलता हासिल की है। पुलिस ने कोरल पार्क क्षेत्र के एक नामी हॉस्टल (SGN अपार्टमेंट) के कमरा नंबर 208 में सर्जिकल स्ट्राइक करते हुए तीन ऐसे शातिर दलालों को धरदबोचा है, जो अंतरराष्ट्रीय साइबर ठगों के 'रीढ़ की हड्डी' बने हुए थे।ये आरोपी भोले-भाले युवाओं और स्थानीय लोगों को चंद रुपयों और मोटे कमीशन का लालच देकर उनके नाम पर बैंक खाते (म्यूल अकाउंट्स) और फर्जी सिम कार्ड तैयार करवाते थे। इसके बाद ये खाते सीधे मुख्य साइबर अपराधियों को सौंप दिए जाते थे, जिनके जरिए देश के कई राज्यों में करोड़ों रुपए की ठगी की काली कमाई को सुरक्षित ठिकाने (मनी लॉन्ड्रिंग) लगाया जा रहा था। इनसाइड स्टोरी: हॉस्टल के कमरे में चल रहा था 'डार्क वेव' का खेलहॉस्टल में रेड से हड़कंप: नोडल अधिकारी सुभाषचंद्र मिश्रा (अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक) और वृत्ताधिकारी पंचम रुद्रप्रकाश शर्मा के सुपरविजन में बोरखेड़ा थानाधिकारी अनिल कुमार टेलर की अगुवाई में जब विशेष पुलिस टीम ने कोरल पार्क में दबिश दी, तो आरोपी दंग रह गए। मौके से झालावाड़ निवासी संचित यादव (22 वर्ष) और अकलेरा निवासी देवेश मेवाड़ा (32 वर्ष) सहित तीन संदिग्धों को दबोचा गया।
डिजिटल सबूतों का अंबार: पुलिस ने जब आरोपियों के मोबाइल फोन की फोरेंसिक और तकनीकी जांच की, तो अधिकारियों की आंखें फटी की फटी रह गईं। मोबाइल के भीतर दर्जनों अज्ञात लोगों के बैंक खातों की पासबुक, चालू एटीएम कार्ड, आधार कार्ड और एक्टिवेटेड सिम कार्ड के फोटो सेव थे।कमीशन का खूनी खेल: पूछताछ में चौंकाने वाला खुलासा हुआ कि ये आरोपी किसी 'जिगरी यार' नामक मुख्य सरगना के इशारे पर काम कर रहे थे। ये लोगों के खाते खुलवाकर किट आगे सप्लाई करते थे और बदले में इन्हें भारी-भरकम फिक्स कमीशन मिलता था।