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आँख उठाकर देखा उसे, वो रो गई, माँ थी ना, आँख बंद कर सह गई।

By Shubh Bhaskar · 11 May 2026 · 34 views
आँख उठाकर देखा उसे, वो रो गई, माँ थी ना, आँख बंद कर सह गई।

दैनिक शुभ भास्कर राजस्थान उदयपुर भुवनेश आमेटा
जन्म देते ही अपने बच्चे को जो पहचान जाए, वो माँ है,
अपने बच्चों के लिए जो भगवान को चुनौती दे, वो माँ है।
परंतु जब बात आए खुद पर, तो क्यों सहम जाएँ,
क्यों अपनों के लिए खुद सूली पर चढ़ जाएँ,
पहचान न पाएँ खुद को, अपने अंदर के बचपन को क्यों दबाए जाएँ?
जन्म दिया उसने, अब आपकी बारी है उसे फिर से जन्म देने की,
आपकी बारी है, वह आपकी पहली दोस्त थी, आपकी सच्ची मित्र थी,
अब बनना है साथी उनका, बताना है आप दोस्त हैं उनके,
वैसे ही अडिग जैसे कि वो थी।

हनीषा आमेटा
धारता, मावली
उदयपुर

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