गैस सिलेंडर की बढ़ती कीमतों पर भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी ने जताई कड़ी आपत्ति।
By Shubh Bhaskar ·
03 May 2026 ·
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गैस सिलेंडर की बढ़ती कीमतों पर भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी ने जताई कड़ी आपत्ति।
*नागपाल शर्मा माचाड़ी की रिपोर्ट*
(माचाड़ीअलवर):- राजगढ़- राजगढ़ क्षेत्र में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीआई) राजगढ़ इकाई ने रसोई गैस एवं कमर्शियल सिलेंडरों की लगातार बढ़ती कीमतों को लेकर कड़ा विरोध दर्ज कराया है। पार्टी द्वारा जारी विज्ञप्ति में कहा गया कि हाल ही में गैस सिलेंडर के दामों में हुई बढ़ोतरी से आमजन पर महंगाई का अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है और लोग आर्थिक दबाव महसूस कर रहे हैं।
पार्टी के अनुसार ०1 मई से गैस सिलेंडर की कीमतों में करीब ₹1000 तक की वृद्धि की गई है, वहीं ०5 किलो का छोटा सिलेंडर भी महंगा कर दिया गया है, जिससे गरीब एवं मध्यम वर्गीय परिवारों पर सीधा असर पड़ा है। पार्टी ने सरकार के इस निर्णय की निंदा करते हुए कहा कि एक ओर गैस की पर्याप्त उपलब्धता का दावा किया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर दाम बढ़ाकर जनता पर बोझ डाला जा रहा है।
विज्ञप्ति में यह भी उल्लेख किया गया कि कोरोना काल के दौरान अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें न्यूनतम स्तर पर थीं, तब भी उपभोक्ताओं को राहत नहीं मिली। इसके साथ ही रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान सस्ते दामों पर कच्चा तेल खरीदने के बावजूद आम जनता को इसका लाभ नहीं दिया गया। पार्टी का आरोप है कि रिफाइंड तेल विदेशों में अपेक्षाकृत कम दामों पर निर्यात किया गया, जबकि घरेलू उपभोक्ताओं को महंगे दाम चुकाने पड़े।
पार्टी ने कहा कि जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें 55-60 डॉलर प्रति बैरल के आसपास थीं, तब भी गैस के दाम कम नहीं किए गए। इसके विपरीत सरकार जीएसटी के माध्यम से लगातार राजस्व अर्जित कर रही है, जिसका भार आमजन पर ही पड़ता है।
सीपीआई ने आरोप लगाया कि सरकार पूंजीपतियों को राहत देने में अधिक रुचि दिखा रही है, जबकि आमजन महंगाई और बेरोजगारी से जूझ रहा है। गैस सिलेंडर की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी से लोगों के सामने रोजी-रोटी का संकट गहराता जा रहा है।
पार्टी के सचिव एडवोकेट मनोज बोहरा ने श्रमजीवी पत्रकार संघ के तहसील उपाध्यक्ष व पार्टी के प्रदेश मिडिया प्रभारी नागपाल शर्मा माचाड़ी को बताते हुए सरकार से मांग की है कि बढ़ाए गए गैस सिलेंडर के दाम तत्काल प्रभाव से वापस लिए जाएं, ताकि आमजन को राहत मिल सके। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि कीमतों में कमी नहीं की गई तो इसका पर्यावरण पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। गैस महंगी होने पर गरीब वर्ग वैकल्पिक ईंधन के रूप में लकड़ी का उपयोग बढ़ा सकता है, जिससे पेड़ों की कटाई बढ़ने की आशंका है और पर्यावरण को नुकसान पहुंच सकता है।