मरे हुए सांप के डसने से ०3 की मौत: एक कहानी, जो समाज का आईना बन गई! *डॉ सुरेश चंद शर्मा*
By Shubh Bhaskar ·
01 May 2026 ·
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मरे हुए सांप के डसने से ०3 की मौत: एक कहानी, जो समाज का आईना बन गई! *डॉ सुरेश चंद शर्मा*
*नागपाल शर्मा माचाड़ी की रिपोर्ट*
(माचाड़ीअलवर):- जयपुर- जयपुर सर्व समाज जागृति संघ के संस्थापक अध्यक्ष व बृजवासी गौरक्षक सेना भारत संघ के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सुरेश चंद शर्मा ने संस्था के राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी नागपाल शर्मा माचाड़ी को जानकारी देते हुए बताया कि आज के दौर में एक छोटी-सी कहानी हमारे समाज की बड़ी सच्चाई को उजागर करती नजर आती है। यह कोई सामान्य खबर नहीं, बल्कि एक ऐसा प्रतीकात्मक प्रसंग है जो वर्तमान सामाजिक हालात पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
कहानी के अनुसार, खेत की ओर जाते समय तीन लोगों को रास्ते में एक सांप दिखाई देता है। तीनों मिलकर उस पर लाठियों से वार करते हैं—किसी ने उसकी पीठ पर मारा, किसी ने फन पर और किसी ने मुंह पर। अंततः सांप मर जाता है। लेकिन इसके बाद शुरू होता है असली विवाद। तीनों इस बात पर झगड़ने लगते हैं कि सांप को किसने मारा। देखते ही देखते बहस इतनी बढ़ जाती है कि वे आपस में ही एक-दूसरे पर लाठियां बरसाने लगते हैं और अंततः तीनों की मौत हो जाती है। वहीं, घायल सांप थोड़ी हरकत के बाद झाड़ियों में सरक जाता है।
यह कहानी आज के समाज का सटीक चित्रण करती है। जहां हमें सामाजिक बुराइयों रूपी "सांप" को मिलकर खत्म करना चाहिए, वहीं हम आपसी विवादों में उलझकर खुद को ही नुकसान पहुंचा रहे हैं। धर्म, जाति और मजहब के नाम पर बढ़ती खाई समाज को कमजोर कर रही है।
आज स्थिति यह है कि "मैं सही हूं" और "तुम गलत हो" की सोच ने हमें बांट दिया है। अगर यही हाल रहा, तो आने वाला समय और भी भयावह हो सकता है—जहां लोग आपसी संघर्ष में उलझे रहेंगे और बुराइयां जख्मी होते हुए भी जिंदा रहेंगी।
लेख के अंत में यही सवाल उठता है—आखिर हम जा कहां रहे हैं? हम अपनी आने वाली पीढ़ियों को क्या दे रहे हैं? नफरत, भेदभाव और बीमारियों से भरा समाज, या फिर एक बेहतर और समरस भविष्य?
यह समय आत्ममंथन का है। हमें अहिंसा, शांति और सह-अस्तित्व के मार्ग पर चलने की आवश्यकता है। यही संदेश संतों और महापुरुषों ने दिया है, और अब उसे अपनाने का समय आ गया है।