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दुर्घटना या सुनियोजित हत्या?” बिजली विभाग के टेंडरों में गड़बड़ी के आरोप, संविदा कर्मियों के शोषण का मामला गरमाया।

By Shubh Bhaskar · 30 Apr 2026 · 44 views
दुर्घटना या सुनियोजित हत्या?” बिजली विभाग के टेंडरों में गड़बड़ी के आरोप, संविदा कर्मियों के शोषण का मामला गरमाया।

*नागपाल शर्मा माचाड़ी की रिपोर्ट*

(माचाड़ीअलवर):-अलवर- अलवर जिले में बिजली विभाग से जुड़ा एक गंभीर मामला सामने आया है, जिसमें टेंडर प्रक्रिया और कार्य व्यवस्था को लेकर बड़े सवाल खड़े हो रहे हैं। आरोप है कि विभागीय अधिकारियों और ठेकेदार कंपनियों की मिलीभगत से नियमों को दरकिनार कर संविदा कर्मियों से दो अलग-अलग कंपनियों का काम लिया जा रहा है।
जानकारी के अनुसार, बिजली विभाग द्वारा विभिन्न विद्युत कार्यों के लिए अलग-अलग कंपनियों को टेंडर जारी किए गए हैं। इनमें संध्या कंपनी को फॉल्ट रिपेयर टीम (FRT) के तहत लाइन फॉल्ट सुधार का कार्य सौंपा गया है, जबकि L&T कंपनी को नई विद्युत लाइनें बिछाने का ठेका दिया गया है।
मिलीभगत से काम का ‘खेला’!
आरोप है कि दोनों कंपनियां विभागीय अधिकारियों के साथ मिलकर FRT के संविदा कर्मचारियों से ही L&T कंपनी के कार्य भी करवा रही हैं। यानी एक ही कार्मिक से दो कंपनियों का काम लिया जा रहा है, जबकि भुगतान केवल एक ही कंपनी के नाम पर किया जा रहा है।
भुगतान में गड़बड़ी के आरोप
सूत्रों का कहना है कि विभाग द्वारा दोनों कंपनियों को भुगतान किया जाता है, लेकिन जमीनी स्तर पर काम एक ही श्रमिक से लिया जा रहा है। इससे दूसरी कंपनी का भुगतान बचाकर कथित रूप से ठेकेदार और अधिकारी आपस में लाभ बांट रहे हैं। यह मामला सीधे तौर पर भ्रष्टाचार और वित्तीय अनियमितताओं की ओर इशारा करता है।
सुरक्षा मानकों की अनदेखी, हादसों का खतरा
सबसे गंभीर पहलू यह है कि संविदा कर्मियों से बिना पर्याप्त सुरक्षा उपकरणों के काम कराया जा रहा है। ऐसे में किसी भी दुर्घटना की स्थिति में जिम्मेदारी तय करना मुश्किल हो जाता है। इसी को लेकर सवाल उठ रहा है कि क्या ऐसी घटनाएं महज दुर्घटनाएं हैं या फिर लापरवाही और भ्रष्टाचार का परिणाम।
*उठ रहे सवाल*
क्या टेंडर नियमों का उल्लंघन किया जा रहा है?
एक ही कर्मी से दो कंपनियों का कार्य क्यों लिया जा रहा है?
सुरक्षा मानकों की अनदेखी के लिए जिम्मेदार कौन?
मामले की निष्पक्ष जांच कब होगी?
स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों ने इस पूरे प्रकरण की उच्च स्तरीय जांच की मांग की है, ताकि सच्चाई सामने आ सके और दोषियों पर कार्रवाई हो सके।
*निष्कर्ष:*
यह मामला न केवल प्रशासनिक लापरवाही बल्कि संभावित भ्रष्टाचार और श्रमिकों के शोषण की गंभीर तस्वीर पेश करता है। अब देखना होगा कि जिम्मेदार विभाग इस पर क्या कार्यवाही करता है और क्या पीड़ितों को न्याय मिल पाता है या नहीं।

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