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कलम बनाम कैमरा: जब पत्रकारिता सच नहीं, दबाव का हथियार बन जाए।

By Shubh Bhaskar · 25 Apr 2026 · 25 views
कलम बनाम कैमरा: जब पत्रकारिता सच नहीं, दबाव का हथियार बन जाए।


*नागपाल शर्मा माचाड़ी की रिपोर्ट*

(माचाड़ीअलवर):- राजगढ़- राजगढ़ क्षेत्र में पत्रकारिता के नाम पर बढ़ती अव्यवस्था अब गंभीर चिंता का विषय बनती जा रही है। जिस पेशे को कभी सत्य, निष्पक्षता और जनसेवा का प्रतीक माना जाता था, वही आज कुछ लोगों के कारण अपनी विश्वसनीयता खोता नजर आ रहा है। राजगढ़ में कथित फर्जी पत्रकारों की सक्रियता ने न केवल मीडिया की छवि को धूमिल किया है, बल्कि आमजन और प्रशासन के लिए भी नई चुनौतियां खड़ी कर दी हैं।
बताया जा रहा है कि कुछ लोग बिना किसी मान्यता, प्रशिक्षण या जिम्मेदारी के खुद को पत्रकार बताकर सक्रिय हैं। मामूली आर्थिक लाभ के लिए खबरों को तोड़-मरोड़ कर पेश करना, नेताओं की चापलूसी करना और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर सनसनी फैलाना आम बात हो गई है। इससे न केवल तथ्यात्मक पत्रकारिता प्रभावित हो रही है, बल्कि जनता का विश्वास भी कमजोर पड़ रहा है।
सोशल मीडिया बना बड़ा माध्यम, लेकिन जिम्मेदारी नदारद
यूट्यूब और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के बढ़ते प्रभाव के चलते हर दूसरा व्यक्ति कैमरा उठाकर खुद को पत्रकार घोषित कर रहा है। बिना सत्यापन के खबरें प्रसारित करना, छोटी घटनाओं को बढ़ा-चढ़ाकर दिखाना और बाद में सच्चाई सामने आने पर पीछे हट जाना—यह प्रवृत्ति तेजी से बढ़ रही है।
*“PRESS” का दुरुपयोग बना चिंता का विषय*
सबसे गंभीर स्थिति तब सामने आती है जब ऐसे लोग अपनी गाड़ियों पर “PRESS” लिखकर विशेष अधिकारों का दुरुपयोग करते हैं। ट्रैफिक नियमों की अनदेखी, प्रतिबंधित क्षेत्रों में प्रवेश, पुलिस कार्यवाही में हस्तक्षेप—ये सब कानून व्यवस्था के लिए चुनौती बनते जा रहे हैं। “PRESS” का प्रतीक, जो कभी सम्मान का चिन्ह था, अब कुछ लोगों के लिए दबाव बनाने का माध्यम बन गया है।
*ब्लैकमेलिंग और छवि धूमिल करने के आरोप*
कई मामलों में यह भी सामने आया है कि तथाकथित पत्रकार बिना सत्यता की पुष्टि किए खबरें प्रसारित कर लोगों की छवि को नुकसान पहुंचाते हैं। कुछ मामलों में ब्लैकमेलिंग जैसी गंभीर शिकायतें भी सामने आ रही हैं, जो इस समस्या को और भयावह बनाती हैं।
*ईमानदार पत्रकार हो रहे प्रभावित*
इस स्थिति का सबसे बड़ा नुकसान उन पत्रकारों को हो रहा है जो ईमानदारी और निष्पक्षता के साथ अपने कर्तव्यों का निर्वहन कर रहे हैं। फर्जी पत्रकारों की भीड़ में उनकी आवाज दबती जा रही है, जिससे पत्रकारिता की गरिमा को ठेस पहुंच रही है।
*प्रशासन से सख्त कार्रवाई की मांग*
अब समय आ गया है कि प्रशासन इस मुद्दे पर सख्त रुख अपनाए। फर्जी पत्रकारों की पहचान कर उनके खिलाफ कानूनी कार्यवाही की जाए और “PRESS” के नाम पर हो रहे दुरुपयोग पर रोक लगाई जाए। यह केवल मीडिया की साख का प्रश्न नहीं, बल्कि समाज की सुरक्षा और व्यवस्था बनाए रखने का भी मामला है।
यदि समय रहते इस समस्या पर नियंत्रण नहीं किया गया, तो आने वाले समय में पत्रकारिता का मूल उद्देश्य पूरी तरह प्रभावित हो सकता है, और “कलम” की शक्ति कमजोर पड़ सकती है।

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