रंगों के माध्यम से खिलते सपने: जे. जे. स्कूल ऑफ आर्ट में विकलांग कलाकारों के लिए ' विविधता का उत्सव '
By Shubh Bhaskar ·
07 Apr 2026 ·
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रंगों के माध्यम से खिलते सपने: जे. जे. स्कूल ऑफ आर्ट में
विकलांग कलाकारों के लिए ' विविधता का उत्सव '
शुभ भास्कर दिव्यासोहनलाल जोशी
मुंबई , दिनांक 7: कैनवास पर रंग चमक रहे थे , लेकिन वे महज़ चित्र नहीं थे, बल्कि सपनों का प्रतिबिंब थे। हर रेखा में दृढ़ संकल्प, हर रंग में आशा और हर कलाकृति में स्वयं को सिद्ध करने की शक्ति थी । यह अवसर सर जे. जे. स्कूल ऑफ आर्ट , आर्किटेक्चर एंड डिज़ाइन में दिव्यांग कलाकारों के लिए आयोजित एक विशेष कला कार्यशाला का था।
मुंबई के जे. जे. स्कूल ऑफ आर्ट , आर्किटेक्चर एंड डिज़ाइन में 6 से 8 अप्रैल 2026 तक दिव्यांग कलाकारों के लिए एक विशेष कला कार्यशाला का आयोजन किया गया । जे. जे. स्कूल ऑफ आर्ट, आर्किटेक्चर एंड डिज़ाइन के सहयोग से और IASOWA तथा राष्ट्रीय बौद्धिक रूप से विकलांग सशक्तिकरण संस्थान ( NIEPID) के संयुक्त आयोजन में मुंबई और आसपास के विभिन्न संस्थानों के 42 दिव्यांग कलाकारों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और अपनी रचनात्मकता की झलक प्रस्तुत की। इस कार्यशाला में 18 से अधिक संस्थानों ने भाग लिया। इस पहल का नेतृत्व IASOWA की अध्यक्ष मीनाक्षी अग्रवाल कर रही हैं।
कला के माध्यम से एक अलग पहचान
इस कार्यशाला की विशेषता विविधता से उपजी रचनात्मकता है। ऑटिज़्म, डाउन सिंड्रोम , बौद्धिक अक्षमता , श्रवण हानि, निकट दृष्टि दोष , पक्षाघात जैसी विभिन्न प्रकार की अक्षमताओं पर विजय प्राप्त करते हुए , इन कलाकारों ने कला के माध्यम से अपनी अनूठी पहचान बनाई। कलाकारों ने सूक्ष्म विवरणों से परिपूर्ण चित्र बनाए। प्रत्येक कलाकार का अपना अनूठा दृष्टिकोण था। हर रेखा में प्रयास, हर रंग में दृढ़ संकल्प और हर चित्र में यह आत्मविश्वास झलक रहा था कि मैं भी कुछ कर सकता हूँ।
दिव्यांग कलाकारों के लिए कला एक अनूठी पहचान का निर्माण करती है। उनके जीवन की चुनौतियाँ , संघर्ष और अनुभव कला के माध्यम से अधिक प्रभावी ढंग से व्यक्त होते हैं। जहाँ शब्द अपर्याप्त होते हैं , वहाँ रंग उनकी भावनाओं को स्पष्ट रूप से व्यक्त करते हैं। कभी-कभी एक साधारण चित्र भी उनके मन के गहरे विचारों और भावनाओं को व्यक्त कर सकता है। शारीरिक या बौद्धिक चुनौतियों के बावजूद, ये बच्चे कला के माध्यम से अपनी अनूठी पहचान बना रहे हैं।
सही मार्गदर्शन , प्रोत्साहन और मंच मिलने पर इन बच्चों की कला का विकास होगा। स्कूलों, संस्थानों और शिक्षकों की भूमिका इसमें बहुत महत्वपूर्ण है। यदि उनकी कला को कम उम्र में ही सही दिशा दी जाए, तो वे न केवल अच्छे कलाकार बनेंगे बल्कि आत्मविश्वासी व्यक्ति भी बनेंगे। दिव्यांग बच्चों की कला को प्रोत्साहित करना केवल परिवार या संस्थानों की ही नहीं , बल्कि पूरे समाज की जिम्मेदारी है। उनकी कलाकृतियों की सराहना करना , प्रदर्शनियों में जाना और उन्हें अवसर प्रदान करना ही उनके लिए सच्ची प्रेरणा है।
इस कार्यशाला का उद्देश्य रचनात्मक चित्रकला सत्र, कौशल विकास गतिविधियाँ , आत्मविश्वास बढ़ाने के अवसर और कला के क्षेत्र में कैरियर के रास्तों का परिचय प्रदान करना है ।
कार्यशाला का समापन 8 अप्रैल को एक चित्रकला प्रदर्शनी के साथ होगा। प्रदर्शनी का उद्घाटन दोपहर 3 बजे जे. जे. स्कूल ऑफ आर्ट के मुख्य सभागार में होगा और यह 8 से 10 अप्रैल 2026 तक सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक जनता के लिए खुली रहेगी।
दिव्यांग कलाकारों ने अपनी कला के माध्यम से यह सिद्ध कर दिया है कि शरीर की सीमाएँ तो होती हैं , लेकिन सपनों और रचनात्मकता की कोई सीमा नहीं होती। दिव्यांग कलाकारों के लिए आयोजित यह ' विविधता महोत्सव ' मात्र एक कला आयोजन नहीं है , बल्कि कला का एक ऐसा उत्सव है जो उनके सपनों को पंख देता है।