निजी स्कूलों की मनमानी के खिलाफ बुलंद आवाज, अभिभावकों के शोषण पर उठे सवाल।
By Shubh Bhaskar ·
04 Apr 2026 ·
17 views
निजी स्कूलों की मनमानी के खिलाफ बुलंद आवाज, अभिभावकों के शोषण पर उठे सवाल।
*नागपाल शर्मा माचाड़ी की रिपोर्ट*
(माचाड़ीअलवर):- उत्तर प्रदेश- उत्तर प्रदेश में निजी विद्यालयों द्वारा महंगी किताबों के नाम पर अभिभावकों के आर्थिक शोषण का मुद्दा एक बार फिर जोर पकड़ता नजर आ रहा है। इस गंभीर विषय पर चिंता व्यक्त करते हुए भारतीय जाटव समाज के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं वरिष्ठ नेता उपेंद्र सिंह ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को एक विस्तृत पत्र भेजकर ठोस कार्यवाही की मांग की है।
उपेंद्र सिंह ने अपने पत्र में कहा कि प्रदेश के कई निजी विद्यालय शिक्षा विभाग के निर्देशों की अनदेखी करते हुए अभिभावकों पर अनावश्यक आर्थिक बोझ डाल रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि NCERT की सस्ती और गुणवत्तापूर्ण पुस्तकों की जगह निजी प्रकाशकों की महंगी ‘रिफरेंस’ किताबों को अनिवार्य किया जा रहा है, जिससे अभिभावकों की जेब पर अतिरिक्त दबाव पड़ रहा है।
उन्होंने यह भी बताया कि कई विद्यालय प्रबंधन और चुनिंदा पुस्तक विक्रेताओं के बीच कथित सांठगांठ के चलते अभिभावकों को केवल निर्धारित दुकानों से ही पुस्तकें खरीदने के लिए मजबूर किया जाता है। इन दुकानों पर न तो कोई छूट मिलती है और न ही विकल्प, जिससे आम परिवारों की आर्थिक स्थिति प्रभावित हो रही है।
उपेंद्र सिंह ने चिंता जताई कि शिक्षा, जो समाज सेवा का माध्यम होनी चाहिए, वह धीरे-धीरे व्यापार का रूप लेती जा रही है। उन्होंने कहा कि हर वर्ष किताबों के नाम पर बढ़ता खर्च मध्यम और निम्न आय वर्ग के परिवारों के लिए गंभीर चुनौती बन चुका है।
मुख्यमंत्री से रखी गई प्रमुख मांगें:
सभी निजी विद्यालयों को एनसीईआरटी पाठ्यक्रम और पुस्तकों को प्राथमिकता देने के सख्त निर्देश दिए जाएं
निजी प्रकाशकों की पुस्तकों के लिए मूल्य सीमा तय की जाए
अभिभावकों को एक ही दुकान से खरीद के लिए बाध्य करने वाले स्कूलों पर कड़ी कार्यवाही हो
जिला स्तर पर निगरानी समितियों का गठन किया जाए ताकि शिकायतों का त्वरित समाधान हो सके
इस मुद्दे ने एक बार फिर शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही की आवश्यकता को उजागर कर दिया है। अभिभावकों को उम्मीद है कि सरकार इस दिशा में जल्द ठोस कदम उठाएगी, जिससे उन्हें राहत मिल सके।