जयपुर: निकाय चुनाव पर सुप्रीम कोर्ट के निर्देश—०5 साल पूरा होते ही कराए जा सकते हैं चुनाव!
By Shubh Bhaskar ·
27 Mar 2026 ·
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जयपुर: निकाय चुनाव पर सुप्रीम कोर्ट के निर्देश—०5 साल पूरा होते ही कराए जा सकते हैं चुनाव!
*नागपाल शर्मा माचाड़ी की रिपोर्ट*
(माचाड़ीअलवर):- जयपुर- राजस्थान में नगरीय निकायों और पंचायतों के चुनावों में हो रही देरी अब संवैधानिक बहस का विषय बन गई है। अधिकांश नगर पालिकाओं का कार्यकाल समाप्त हो चुका है और वर्तमान में प्रशासकों के जरिए कामकाज संचालित किया जा रहा है। वहीं ग्राम पंचायतों में कार्यकाल समाप्त होने के बाद सरपंचों को ही जिम्मेदारी सौंपी गई है, जबकि पंचायत समिति और जिला परिषदों में प्रशासनिक अधिकारियों को प्रशासक नियुक्त किया गया है।
इस बीच, चुनाव टालने के पीछे राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा ओबीसी आयोग की रिपोर्ट लंबित होने का तर्क दिया जा रहा है। हालांकि सुरेश महाजन बनाम मध्य प्रदेश सरकार मामले में सुप्रीम कोर्ट यह स्पष्ट कर चुका है कि ओबीसी आयोग की रिपोर्ट न आने की स्थिति में भी राज्य निर्वाचन आयोग चुनाव कराने के लिए स्वतंत्र है।
संवैधानिक अधिकार और जिम्मेदारी
संविधान के अनुच्छेद 243K (पंचायत) और 243ZA (नगरीय निकाय) के तहत चुनाव कराने की पूरी जिम्मेदारी राज्य निर्वाचन आयोग को दी गई है। यह एक स्वतंत्र संवैधानिक संस्था है, जिसे चुनाव की अधिसूचना जारी करने, कार्यक्रम तय करने और प्रक्रिया संचालित करने का अधिकार प्राप्त है।
सरकार की देरी नहीं बन सकती आधार
किशनसिंह तोमर बनाम म्यूनिसिपल कॉर्पोरेशन ऑफ अहमदाबाद मामले में सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कहा था कि स्थानीय निकायों के चुनाव समय पर कराना अनिवार्य है और सरकार की देरी को इसका आधार नहीं बनाया जा सकता। अदालत ने आयोग को अपने अधिकारों का स्वतंत्र उपयोग करने की भी बात कही थी।
व्यावहारिक अड़चनें भी मौजूद
हालांकि जमीनी स्तर पर कुछ व्यावहारिक बाधाएं भी सामने हैं। नगरीय निकायों में वार्ड परिसीमन और आरक्षण निर्धारण राज्य सरकार के अधीन होते हैं। यदि ये प्रक्रियाएं लंबित रहती हैं, तो चुनाव कार्यक्रम घोषित करना मुश्किल हो जाता है। पंचायत चुनावों में स्थिति कुछ हद तक बेहतर मानी जा रही है क्योंकि मतदाता सूची का कार्य लगभग पूरा हो चुका है।
हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी
राजस्थान हाईकोर्ट की एकलपीठ ने 20 सितंबर 2025 को टिप्पणी की थी कि निर्वाचन आयोग चुनाव में देरी पर आंख बंद करके नहीं बैठ सकता। हालांकि बाद में खंडपीठ ने इस आदेश पर रोक लगाते हुए सरकार को राहत दी, लेकिन 14 नवंबर 2025 को 31 दिसंबर 2025 तक परिसीमन और 15 अप्रैल 2026 तक चुनाव कराने के निर्देश दिए। इन निर्देशों को सुप्रीम कोर्ट ने भी बरकरार रखा है।
ओबीसी आयोग की रिपोर्ट पर संशय
पंचायत और निकाय चुनावों में ओबीसी आरक्षण को लेकर गठित आयोग का कार्यकाल 31 मार्च 2026 तक ही है। आयोग ने सरकार को पत्र लिखकर बताया है कि लगभग 400 ग्राम पंचायतों के आंकड़ों में विसंगतियां हैं, जिससे रिपोर्ट तैयार करने में दिक्कत आ रही है। ऐसे में सर्वे कराने की संभावना जताई जा रही है, लेकिन इसमें समय लगना तय है।
निष्कर्ष:
सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद चुनावों में देरी लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर सवाल खड़े कर रही है। अब नजर राज्य निर्वाचन आयोग के अगले कदम पर टिकी है कि वह अपने संवैधानिक अधिकारों का उपयोग करते हुए समय पर चुनाव करवाता है या नहीं।