शाहपुरा में शाही ठाठ-बाट के साथ निकली गणगौर माता की सवारी, परंपरा और आस्था का अद्भुत संगम
By Shubh Bhaskar ·
22 Mar 2026 ·
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शाहपुरा में शाही ठाठ-बाट के साथ निकली गणगौर माता की सवारी, परंपरा और आस्था का अद्भुत संगम
शाहपुरा-राजेन्द्र खटीक।
शाहपुरा-नगर में गणगौर महोत्सव पर रियासतकालीन परंपराओं की अनुपम छटा देखने को मिली। महलों के चौक से गणगौर माता की शाही सवारी राजसी लवाजमे के साथ विधिवत रूप से प्रारंभ हुई, जिसमें सजे-धजे घोड़े, बैंड-बाजे और पारंपरिक वेशभूषा में सवार दल ने पूरे आयोजन को भव्यता प्रदान की।
शाहपुरा की गणगौर सवारी की सबसे विशिष्ट परंपरा यह है कि इसमें ईशर जी की प्रतिमा शामिल नहीं होती, बल्कि केवल माता पार्वती (गणगौर) की प्रतिमा ही पूरे नगर में भ्रमण करती है। यह परंपरा रियासतकाल से चली आ रही है और आज भी पूरी आस्था व श्रद्धा के साथ निभाई जा रही है।
शाही सवारी अपने पारंपरिक मार्ग से होते हुए सदर बाजार, कुंड गेट पहुंची तथा अंत में नरसिंह द्वार पर विधि-विधान से आरती कर सम्पन्न हुई। मार्ग में जगह-जगह श्रद्धालुओं द्वारा पुष्प वर्षा कर माता का स्वागत किया गया, जिससे वातावरण भक्तिमय हो उठा।
सवारी में सांस्कृतिक रंग भी खूब बिखरे। कच्छी घोड़ी, चरी नृत्य, कठपुतली नृत्य सहित कालका माता एवं नृसिंह भगवान की आकर्षक झांकियों ने दर्शकों का मन मोह लिया। बाहरी राज्यों से आए कलाकारों ने भी अपनी प्रस्तुतियों से आयोजन में चार चांद लगा दिए।
गणगौर पर्व विशेष रूप से सुहागिन महिलाओं के लिए अखंड सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है। महिलाओं ने पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ माता की पूजा-अर्चना कर परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की।
इस प्रकार शाहपुरा की गणगौर सवारी ने एक बार फिर यह सिद्ध कर दिया कि यहां की परंपराएं आज भी जीवंत हैं और जन-जन की आस्था से जुड़ी हुई हैं।