भारतीय नववर्ष का प्रारंभ चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से ही क्यों माना जाता है। *पंडित शिब्बू शास्त्री*
By Shubh Bhaskar ·
18 Mar 2026 ·
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भारतीय नववर्ष का प्रारंभ चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से ही क्यों माना जाता है। *पंडित शिब्बू शास्त्री*
*नागपाल शर्मा माचाड़ी की रिपोर्ट*
(माचाड़ीअलवर):- अलवर- पंडित शिब्बू शास्त्री ईशरोती वाले ने बताया कि भारतीय पंचांग के अनुसार नववर्ष का शुभारंभ चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से माना जाता है। वैदिक कालगणना पद्धति के अनुसार इसी दिन से ग्रहों, वारों, मासों और संवत्सरों की गणना प्रारंभ मानी जाती है। यह परंपरा हजारों वर्षों से चली आ रही है और आज भी धार्मिक-सांस्कृतिक जीवन में इसका विशेष महत्व है।
धार्मिक मान्यता के अनुसार ब्रह्म पुराण में उल्लेख मिलता है कि सृष्टि की रचना इसी दिन से प्रारंभ हुई थी। इसलिए भारतीय संस्कृति में इस तिथि को नवसृजन और नवआरंभ का प्रतीक माना जाता है। प्रकृति और ऋतु परिवर्तन का संदेश
यह समय शीत ऋतु के अंत और वसंत ऋतु के आगमन का संधिकाल होता है। इस दौरान दिन बड़े और रातें छोटी होने लगती हैं। वृक्षों पर नई कोपलें, आम के पेड़ों पर बौर और वातावरण में नवजीवन की ऊर्जा दिखाई देती है। इस प्राकृतिक परिवर्तन को भी नववर्ष की शुरुआत का आधार माना गया है। ऐतिहासिक मान्यता
इतिहास के अनुसार उज्जयिनी के पराक्रमी सम्राट विक्रमादित्य ने शकों पर विजय प्राप्त करने के उपलक्ष्य में विक्रम संवत की स्थापना की थी। उनके नाम पर ही इस कालगणना पद्धति को “विक्रम संवत” कहा जाता है।
पौराणिक और धार्मिक महत्व
मान्यताओं के अनुसार इसी दिन महाभारत के धर्मराज युधिष्ठिर का राज्याभिषेक हुआ था। वहीं कुछ परंपराओं में भगवान राम के राज्याभिषेक का उल्लेख भी इसी तिथि से जोड़ा जाता है।
इसी दिन से चैत्र नवरात्रि का आरंभ होता है, जिसमें नौ दिनों तक माँ दुर्गा की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है।
इस प्रकार चैत्र शुक्ल प्रतिपदा भारतीय संस्कृति, खगोल विज्ञान, इतिहास और प्रकृति—चारों का अद्भुत संगम है। यही कारण है कि इसे भारतीय नववर्ष के रूप में अत्यंत श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जाता है।