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खुशखेड़ा अग्निकांड के मृतक मजदूरों को अब तक नहीं मिला न्याय – *एटक*

By Shubh Bhaskar · 17 Mar 2026 · 14 views
अखिल भारतीय ट्रेड यूनियन कांग्रेस (एटक) अलवर

खुशखेड़ा अग्निकांड के मृतक मजदूरों को अब तक नहीं मिला न्याय – *एटक*

*नागपाल शर्मा माचाड़ी की रिपोर्ट*

(माचाड़ीअलवर):- अलवर- अखिल भारतीय ट्रेड यूनियन कांग्रेस (एटक) ने एक विज्ञप्ति जारी कर खुशखेड़ा स्थित पटाखा फैक्ट्री में लगी भीषण आग की घटना को लेकर राज्य सरकार पर गंभीर सवाल उठाए हैं। संगठन ने कहा कि इस हादसे में फैक्ट्री के ०9 मजदूरों की अकाल मृत्यु हो जाने के बावजूद अब तक पीड़ित परिवारों को न्याय नहीं मिल पाया है।
जिला एटक ने 20 फरवरी को मुख्यमंत्री के नाम जिला कलेक्टर के माध्यम से ज्ञापन भेजकर मृतक मजदूरों के आश्रितों को 50-50 लाख रुपए की आर्थिक सहायता प्रदान करने तथा पूरे मामले की न्यायिक जांच करवाने की मांग की थी। साथ ही डीएसटी में कार्यरत योगेश शर्मा को भी आरोपी बनाए जाने की मांग की गई, क्योंकि वे फैक्ट्री संचालक के भाई बताए जा रहे हैं। संगठन ने उन पुलिस अधिकारियों की भूमिका की जांच की भी मांग की है, जिनके अधीन डीएसटी कार्य कर रही थी।
एटक ने अपने ज्ञापन में पुलिस मिलीभगत की आशंका जताते हुए रीको, कारखाना एवं बॉयलर विभाग, श्रम विभाग, ईएसआईसी तथा कर्मचारी भविष्य निधि कार्यालय की भूमिका की भी निष्पक्ष जांच की आवश्यकता बताई है। संगठन का कहना है कि यदि केवल प्रशासनिक स्तर पर जांच की जाती है तो तथ्यों के छिपाए जाने की संभावना बनी रहती है, इसलिए न्यायिक जांच कराई जाना आवश्यक है।
घटना के बाद पुलिस विभाग द्वारा की जा रही जांच के तहत महानिरीक्षक पुलिस राहुल प्रकाश ने टपूकड़ा थाना अधिकारी व डीएसटी प्रभारी मुकेश कुमार को जांच पूर्ण होने तक अलवर पुलिस लाइन से सीकर पुलिस लाइन भेजा था, जबकि डीएसटी प्रभारी योगेश शर्मा को निलंबित कर दिया गया है। एटक का कहना है कि यदि जांच में पुलिसकर्मी दोषी पाए जाते हैं तो केवल लाइन हाजिर करना या निलंबन पर्याप्त नहीं है, बल्कि उन्हें भी अग्निकांड में आरोपी बनाया जाना चाहिए। संगठन ने आरोप लगाया कि पुलिस विभाग अपने कर्मचारियों को बचाने का प्रयास कर रहा है।
एटक ने यह भी प्रश्न उठाया है कि जिन अधिकारियों पर औद्योगिक क्षेत्र की इकाइयों की सुरक्षा की जिम्मेदारी थी, उन्हीं की टीम बनाकर जांच कराई गई। संयुक्त जांच में कई फैक्ट्रियों में सुरक्षा उपकरणों और नियमों की कमी पाए जाने पर नोटिस जारी किए गए, लेकिन संगठन ने पूछा है कि इन कमियों के बावजूद उद्योगों को शुरू करने की अनुमति कैसे मिली और वे वर्षों से किसके संरक्षण में संचालित हो रहे थे।
संगठन ने आशंका जताई है कि वर्तमान व्यवस्था में ठोस बदलाव नहीं किया गया तो भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति से इनकार नहीं किया जा सकता। एटक ने कहा कि हादसे को एक माह बीत जाने के बाद भी जांच के ठोस परिणाम सामने नहीं आए हैं, इसलिए सरकार से पुनः न्यायिक जांच की मांग दोहराई जाती है।
अंत में एटक ने मीडिया का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि मजदूरों को न्याय दिलाने की लड़ाई में मीडिया उनकी आवाज़ को मजबूती से उठा रहा है। मजदूर यूनियन के जिला मीडिया प्रभारी नागपाल शर्मा माचाड़ी को यह जानकारी एटक के महासचिव तेजपाल सैनी द्वारा दी गई।

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