महुए की खुशबू से महके गांव, सुबह संग्रहण में जुटे ग्रामीण*
By Shubh Bhaskar ·
10 Mar 2026 ·
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*महुए की खुशबू से महके गांव, सुबह संग्रहण में जुटे ग्रामीण*
*शुभ भास्कर*
*रामसिंह मीणा रघुनाथपुरा*
बड़ीसादड़ी क्षेत्र सहित आस - पास के ग्रामीण अंचलों में इन दिनों महुए के पेड़ों से फल गिरने का सिलसिला शुरू हो गया है। खेत-खलिहानों और जंगलों के किनारे लगे इन पेड़ों के नीचे सुबह होते ही ग्रामीणों की चहल-पहल बढ़ जाती है। महिलाएं, पुरुष और बच्चे टोकरियां व थैले लेकर गिरे हुए महुए को सावधानीपूर्वक बीनते नजर आते हैं। इन दिनों गांवों में यह दृश्य आम हो गया है।
ग्रामीणों के लिए महुआ केवल वन उपज ही नहीं, बल्कि आय का एक महत्वपूर्ण साधन भी है। सुबह एकत्रित किए गए महुए को घर लाकर साफ किया जाता है और फिर धूप में सुखाया जाता है। इसके बाद इनका उपयोग पारंपरिक खाद्य पदार्थों, औषधियों तथा देशी मदिरा बनाने में किया जाता है।
ग्रामीणों का कहना है कि महुए की अच्छी पैदावार होने पर बाजार में इसकी बिक्री से परिवारों को अतिरिक्त आय भी प्राप्त होती है। स्थानीय जानकारों के अनुसार महुआ आदिवासी और ग्रामीण अर्थव्यवस्था की महत्वपूर्ण कड़ी है, जो हर साल बड़ी संख्या में लोगों को मौसमी रोजगार उपलब्ध कराता है