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भक्ति का मार्ग जहाँ पत्थर भी पिघलते हैं और जूठे फल भी अमृत बनते हैं-अमृतराम महाराज

By Shubh Bhaskar · 06 Mar 2026 · 21 views
भक्ति का मार्ग जहाँ पत्थर भी पिघलते हैं और जूठे फल भी अमृत बनते हैं-अमृतराम महाराज

पीपाड सिटी।शहर के चिमनाबाड़ी स्थित रामद्वारा में चल रहे हैं सप्त दिवसीय बरसी महोत्सव के दूसरे दिन दिन शुक्रवार को जोधपुर से संत अमृतराम महाराज ने करुणा सागर की कथा में बताया कि भक्त अहिल्या और माता शबरी के प्रसंगों के माध्यम से 'धैर्य' और 'समर्पण' का बहुत ही सुंदर चित्रण किया है। उनके अनुसार, भक्ति केवल पूजा-पाठ नहीं बल्कि परमात्मा की प्रतीक्षा में स्वयं को गला देना है।भक्त वह है जो विपरीत परिस्थितियों में भी ईश्वर पर अपना भरोसा नहीं खोता, जैसे पत्थर बनी अहिल्या ने युगों तक प्रभु के चरणों की प्रतीक्षा की।सच्चा भक्त वही है जिसके हृदय में प्रभु के मिलन की तड़प और आंखों में उनके आगमन की निरंतर प्रतीक्षा हो। इस दौरान संगीतमय भजन की प्रस्तुति के माध्यम से भी कथा का वर्णन किया भक्ति भजन सत्संग प्रतिदिन दोपहर 1 से दोपहर 4:30 बजे तक आयोजित हो रहे हैं वहीं शाम को 8:30 बजे से 10:30 बजे तक रामस्नेही संत द्वारा नानी बाई के मायरे की कथा का वाचन भी किया जा रहा है। जिसमें महिला श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ रही है।

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