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वेस्ट पॉलिथीन में लहराई सब्जियाँ” श्रेया कुमावत के नवाचार से क्षेत्रीय वन अधिकारी व विद्यार्थी हुए प्रेरित, राष्ट्रीय सम्मान की प्रतीक्षा

By Shubh Bhaskar · 28 Feb 2026 · 88 views
“वेस्ट पॉलिथीन में लहराई सब्जियाँ”

श्रेया कुमावत के नवाचार से क्षेत्रीय वन अधिकारी व विद्यार्थी हुए प्रेरित, राष्ट्रीय सम्मान की प्रतीक्षा

शाहपुरा-राजेन्द्र खटीक।

शाहपुरा-देशभर में पल रही प्रदूषण और प्लास्टिक कचरे की बढ़ती समस्या के बीच शाहपुरा की एक नन्ही बालिका ने ऐसा अनोखा प्रयोग कर दिखाया, जिसने पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक नई आशा जगा दी है। धरती और पर्यावरण के लिए घातक मानी जाने वाली दैनिक उपयोग की प्लास्टिक को हरियाली में बदलने का अद्भुत दृश्य “प्रकृति प्रदर्शनी” में देखने को मिला, जिसका आयोजन कक्षा 8 की छात्रा श्रेया कुमावत ने किया।
राजस्थान की प्रसिद्ध बाल पर्यावरण योद्धा, जिन्हें स्नेहपूर्वक “ग्रीन लिटिल बेबी” के नाम से भी जाना जाता है, श्रेया ने मिर्च-मसालों के खाली पैकेट, बच्चों के कुरकुरे की वेस्ट पॉलिथीन और अन्य घरेलू प्लास्टिक थैलियों में दर्जनों जैविक सब्जियाँ, मसाले, हर्बल पौधे और फूल उगाकर सभी को आश्चर्यचकित कर दिया। सबसे उल्लेखनीय बात यह रही कि श्रेया ने देश में पराली प्रदूषण के संकट को ध्यान में रखते हुए बिना मिट्टी के, पराली अपशिष्ट में ही स्वस्थ पौधे उगाकर यह सिद्ध कर दिया कि यदि वैज्ञानिक सोच और सकारात्मक दृष्टिकोण हो, तो अपशिष्ट भी संसाधन बन सकता है। उनका यह प्रयोग संदेश देता है कि खेतों में पराली को जलाने के बजाय उसका निस्तारण कर उसी में फसल उगाई जाए तो स्वस्थ जैविक उत्पादन और बेहतर पैदावार संभव है।
प्रदर्शनी का अवलोकन करने पहुँची क्षेत्रीय वन अधिकारियों की टीम पॉलिथीन में लहलहाती सब्जियाँ देखकर दंग रह गई। अधिकारियों ने इसे पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक व्यवहारिक, किफायती और अनुकरणीय मॉडल बताया। स्थानीय स्कूलों के छात्र-छात्राओं ने भी इस प्रदर्शनी से प्रेरणा लेते हुए संकल्प लिया कि वे प्लास्टिक को इधर-उधर नहीं फेंकेंगे, बल्कि उसका पुनः उपयोग कर हरियाली बढ़ाने में योगदान देंगे। स्वामी विवेकानंद केंद्रीय मॉडल स्कूल की छात्रा श्रेया बाल्यकाल से ही पर्यावरण संरक्षण, वृक्षारोपण और जनजागरण अभियानों में सक्रिय रही हैं। साधारण परिवार से होने के बावजूद वे अपने माता-पिता के सहयोग से “हरित भारत” एवं “प्लास्टिक मुक्त भारत” के राष्ट्रीय संकल्प के अंतर्गत निरंतर पर्यावरण जागरूकता प्रदर्शनी अभियान आयोजित कर रही हैं। इस अभियान में उन्होंने उल्लेखनीय आर्थिक एवं व्यक्तिगत योगदान भी दिया है।
गौरतलब है कि श्रेया कुमावत ने देश के प्रतिष्ठित बाल सम्मान प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार के लिए कई बार आवेदन किया है, किंतु अभी तक उन्हें यह सम्मान प्राप्त नहीं हो सका है। इसके बावजूद उनका उत्साह, समर्पण और पर्यावरण के प्रति अटूट प्रतिबद्धता निरंतर प्रेरणास्रोत बनी हुई है। शहर में आयोजित “प्रकृति प्रदर्शनी” आज एक जनप्रेरणा का केंद्र बन चुकी है, जहाँ आमजन से लेकर विद्यार्थी और अधिकारी तक पहुँचकर सीख ले रहे हैं। श्रेया की यह पहल स्पष्ट संदेश देती है कि परिवर्तन की शुरुआत बड़े संसाधनों से नहीं, बल्कि बड़े संकल्प से होती है। वास्तव में, यदि सोच सकारात्मक हो तो कचरा भी हरियाली में बदल सकता है, और एक नन्हा प्रयास भी समाज में व्यापक परिवर्तन का आधार बन सकता है। श्रेया कुमावत का यह नवाचार न केवल पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक प्रेरक कदम है, बल्कि आने वाली पीढ़ी के लिए जिम्मेदारी और जागरूकता का जीवंत उदाहरण भी है।

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