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धारता गांव की ढूंढोत्सव परम्परा और वडुलिया गोबर से बने हुये की माला होली को पहनाने की परम्परा

By Shubh Bhaskar · 27 Feb 2026 · 186 views
धारता गांव की ढूंढोत्सव परम्परा और वडुलिया गोबर से बने हुये की माला होली को पहनाने की परम्परा
दैनिक शुभ भास्कर भुवनेश आमेटा राजस्थान उदयपुर मावली तहसील धरता गांव में आज जहाँ लड़की को पैदा होने से पहले ही मारा जा रहा हैं या उन्हें मरने के लिये किसी झाडी या नाले में फेंक दिया जाता है उसी समाज में एक ऐसा गांव भी है जहाँ बेटियों के पैदा होने पर पूरा गांव खुशी मनाता है। बेटियों भी बेटों से कम नहीं है। वे उन्हें खूब पढ़ाते है और आगे बढ़ने के लिये प्रेरित करते है। मावली तहसील के अन्तर्गत खेमपुर ग्राम पंचायत के धारता गाँव मे बेटी बचाने की अनोखी परम्पराएं वर्षो से आज भी कायम है।
बेटियों द्वारा वडुलिया गोबर से बने हुये की माला बनाकर होली को पहनाने की परम्परा: धारता गाँव में आज भी बच्चियों द्वारा वडुलिया गोबर से बने हुये की माला बनाकर होली को पहनाने की परम्परा वर्षो से आज भी कायम है जो बेटी बचाओं का संदेश तो देती ही है साथ ही भाई-बहिन के पवित्र रिश्ते को भी मजबूत करती है। माताएँ उनकी मदद करती है और परंपरा के बारे मे बताती है।
वडुलिया जो गोबर से बनते है वो केवल बेटियों द्वारा ही बनाये जाते है। सुखने पर उसकी माला बनाकर गाँव की लड़कियां होली जलाने से पूर्व होली को माला पहनाने जाती है। साथ ही इस माला में एक गोबर का नारियल भी बनाती है उसमें अपनी सुविधानुसार चोकलेट, पैसे रखती है। उस नारियल को लड़की का भाई होली के स्थान पर फोड़कर उसमें से चोकलेट, पैसे निकालता है और बहिन माला को होली को पहना देती है। यह माला सिर्फ लड़की ही बनाती है और लड़की ही पहनाने जाती है।आज के समय में बेटी को पैदा होने से पहले ही मारा जा रहा है वहीं धारता गाँव में यह परम्परा वर्षो से कायम है जो बेटी बचाओं का संदेश तो देती ही है साथ ही भाई-बहिन के पवित्र रिश्ते को भी मजबूत करती है।
बेटी बचाओं की अनोखी परम्परा ढूंढोत्सव
होली के समय ढूढोत्सव के कार्यक्रम में सबसे पहले गाँव में जिस परिवार में लड़की होती हैं जिसकी पहली ढूंढ होती है ढूंढोत्सव की शुरूआत उस घर से ही करते है। गांव के सभी लोग माताजी के यहाँ एकत्रित होते है। यदि गांव मे जिस लड़की की पहली ढूंढ़ होती है यदि लड़की नहीं है तो सबसे पहले रोडी जहाँ गोबर ड़ालते है वहा उसको लक्ष्मी का रूप मानकर सभी लोग ढोल-नंगाडों के साथ वहाँ सबसे जाते हैं और उसकी पूजा कर शुरुआत करते है । यदि लड़की है तो जिस परिवार में लड़की होती हैं जिसकी पहली ढूंढ होती है उस घर से ही ढूंढोत्सव की शुरुआत करते है। घर में जैसे उत्सव का माहौल हो जाता है। गांव वाले पीली मिट्टी से मांडना बनाते है उस लड़की को जिसकी प्रथम होली हैं उसके रिश्तेदार द्वारा गोदी में लेकर बैठाया जाता हैं वो भी लड़की ही लेकर बैठती है। उसकी लम्बी उम्र के लिये सब प्रार्थना करते हैं। वहीं लड़की के परिवार द्वारा गाँव के सभी लोगों को गुड़-मिठाई खिलाकर सबका मुँह मिठा कराया जाता हैं। उसके बाद फिर दूसरी जगह जिस परिवार में लड़का हुआ हैं वहाँ जाते हैं। ढूंढोत्सव की शुरूआत बेटी की ढूंढ से ही होती है।
धारता गांव में आज भी वर्षो से ये परम्पराएं कायम है जो कहीं न कहीं बेटी बचाने का संदेश भी दे रही है।

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