गौ कास्ट से करें होली का दहन, धार्मिक परंपराओं के निर्वहन के साथ पर्यावरण की होगी रक्षा शिव शंकर गौशाला में होली दहन के लिए तैयार हो रहें हैं गौ कास्ट
By Shubh Bhaskar ·
27 Feb 2026 ·
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गौ कास्ट से करें होली का दहन, धार्मिक परंपराओं के निर्वहन के साथ पर्यावरण की होगी रक्षा
शिव शंकर गौशाला में होली दहन के लिए तैयार हो रहें हैं गौ कास्ट
दैनिक शुभ भास्कर रूपलाल तेली राजस्थान उदयपुर
पर्यावरण शुद्ध है तो जीवन स्वस्थ है। जंगलों में पेड़ है तो पर्यावरण में भरपूर शुद्ध ऑक्सीजन। शुद्ध ऑक्सीजन से ही मानव स्वस्थ रहेगा। ऑक्सीजन का महत्व कोरोना काल में सभी ने देखा है। इसी परिकल्पना को ध्यान में रखते हुए शिव शंकर को साल में एक सार्थक पहल की है।
होलिका दहन कास्ट गोबर के कंडे के साथ।
गौशाला में गायों के गोबर से गौ कास्ट एवं गरगोलीये बनाए जा रहे हैं।
धार्मिक परंपरा का निर्वहन एवं प्रकृति की होगी रक्षा- भारत गांव का देश है। गांव के लोगों के जीवन यापन मुख्यतः कृषि पर आधारित है। किसान के खेत खलियान में जब नई फसल तैयार हो जाती हैं, इस समय धार्मिक पर्व होली का आगमन होता है। नई फसल की खुशी होली के रूप में मनाते हैं। होली में नई अनाज की आहुति देकर लोग सुख समृद्धि एवं खुशहाली की कामना करते हैं ।होली में मुख्यतः घास एवं लकड़ी जलाई जाती है। होली में लकड़ी के बजाए गायों के गोबर से बने गौ कास्ट एवं गरगोलीये का उपयोग किया जाए तो प्रकृति की रक्षा होगी और पर्यावरण भी शुद्ध होगा।
होली में को कास्ट एवं गरगोलीये से मनाए होली शिव शंकर गौशाला के सचिव शालिनी राजावत एवं मीडिया प्रभारी नरेश पूर्बिया ने बताया कि शिव शंकर गौशाला में गायों के गोबर से गौ कास्ट एवं गरगोलीये बनाए जा रहे हैं। जिसका उपयोग होली में लकड़ी के स्थान पर किया जा सकता है। नरेश पूर्बिया ने बताया कि इससे हजारों पेड़ काटने से बच सकते हैं। पर्यावरण संतुलित रहेगा और गौशालाओं को भी आर्थिक संबल मिलेगा। होली धार्मिक पर्व के साथ गौ सेवा भी हो जाएगी। गांव में बच्चे गोबर के गरगोलिये की माला बनाकर होली को पहनाकर होली जलाते हैं आए हैं और खुशियां मनाते हैं।
वैज्ञानिक आधार- प्राचीन काल से धार्मिक कार्यों में किए जाने वाले हवन यज्ञ में हवन सामग्री के साथ गोबर के कंडे उपयोग में लिए जाते हैं। होली का पर्व भी हवन यज्ञ के समान है। जिसमें सूखा नारियल,काले तिल, कपूर, लौंग, गेहूं की बाली, हरे चने एवं गौ कास्ट के साथ होलिका दहन करने से पर्यावरण शुद्ध होगा और धार्मिक परंपरा का निर्वहन के साथ गौशालाओं को आर्थिक संबल मिलेगा। और गौ सेवा भी हो जाएगी।