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आजादी अभी अधूरी है: स्वतंत्र अभिव्यक्ति और गुप्त मतदान के सदुपयोग पर बल।

By Shubh Bhaskar · 24 Feb 2026 · 10 views
आजादी अभी अधूरी है: स्वतंत्र अभिव्यक्ति और गुप्त मतदान के सदुपयोग पर बल।

*नागपाल शर्मा माचाड़ी की रिपोर्ट*

(माचाड़ीअलवर):- अलवर- सामाजिक सरोकारों से जुड़े नागरिकों ने कहा है कि देश की आजादी तभी पूर्ण मानी जाएगी, जब हर वर्ग को समान अधिकार और समान अवसर की वास्तविक अनुभूति हो। वक्ताओं ने जोर देते हुए कहा कि लोकतंत्र की मजबूती के लिए स्वतंत्र अभिव्यक्ति और गुप्त मतदान के अधिकार का सजग व जिम्मेदार उपयोग अत्यंत आवश्यक है।
चर्चा के दौरान यह प्रश्न भी उठाया गया कि जब विभिन्न वर्गों के लिए केंद्र और राज्यों में आयोग गठित हैं, तो सामान्य वर्ग के लिए अलग आयोग की व्यवस्था क्यों नहीं है। सामाजिक सुरक्षा के नाम पर बनाए गए कुछ प्रावधानों को लेकर भी असंतोष व्यक्त किया गया। वक्ताओं का कहना था कि किसी भी वर्ग को जन्मजात अपराधी की तरह देखना या राजनीतिक दृष्टिकोण से आंकना उचित नहीं है। इससे समाज में वैमनस्य बढ़ता है और दीर्घकाल में यह सामाजिक विघटन का कारण बन सकता है।
सभा में यह भी कहा गया कि वोट बैंक की राजनीति देशहित में नहीं है। “वसुधैव कुटुंबकम” की भावना को अपनाते हुए परिवार, समाज और राष्ट्र के समग्र विकास के लिए सतत प्रयास आवश्यक हैं। सभी नागरिकों से अपील की गई कि वे अपने मताधिकार का अवश्य प्रयोग करें और यदि किसी उम्मीदवार से संतुष्ट न हों तो अंतिम विकल्प के रूप में नोटा (NOTA) का उपयोग करें।
राजनीतिक आरक्षण व्यवस्था पर भी चर्चा हुई। कुछ वक्ताओं ने मांग उठाई कि सामान्य वर्ग की सीटों पर आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों को चुनाव लड़ने की अनुमति क्यों है, जबकि आरक्षित सीटों पर सामान्य वर्ग को अवसर नहीं मिलता। पंचायत राज संस्थाओं में रोटेशन प्रणाली लागू है, तो संसद और विधानसभा में भी ऐसी व्यवस्था क्यों नहीं होनी चाहिए—यह सवाल भी प्रमुखता से रखा गया। साथ ही जनसंख्या के आधार पर परिसीमन की प्रक्रिया को लेकर भी पारदर्शिता और समानता की मांग की गई।
अंत में वक्ताओं ने कहा कि लोकतंत्र की मजबूती के लिए सभी वर्गों के बीच संवाद, संतुलन और समान अवसर की नीति अपनाना समय की आवश्यकता है।

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