अखण्ड काव्य धारा–2026 साझा संकलन का हुआ ऑनलाइन लोकार्पण।
By Shubh Bhaskar ·
21 Feb 2026 ·
28 views
अखण्ड काव्य धारा–2026 साझा संकलन का हुआ ऑनलाइन लोकार्पण।
"नागपाल शर्मा माचाड़ी की रिपोर्ट*
(माचाड़ीअलवर):- वृन्दावन- देश की प्रतिष्ठित साहित्यिक संस्था अखण्ड संडे (इंदौर) के 29वें स्थापना दिवस के अवसर पर प्रकाशित साझा संकलन “अखण्ड काव्य धारा–2026” (भाग-6) का 118वां ऑनलाइन लोकार्पण प्रख्यात साहित्यकार डॉ. गोपाल चतुर्वेदी द्वारा किया गया।
लोकार्पण अवसर पर डॉ. गोपाल चतुर्वेदी ने कहा कि 131 रचनाकारों की 263 उत्कृष्ट रचनाओं—कविता, गीत, ग़ज़ल और दोहों—से सुसज्जित यह साझा संकलन समाज में व्याप्त विसंगतियों को दूर कर सभी को एक सूत्र में पिरोने का कार्य करेगा। उन्होंने “अखण्ड काव्य धारा” को पावन गंगधार की तरह अविरल और प्रेरणादायी बताया।
प्रख्यात ललित निबंधकार नर्मदा प्रसाद उपाध्याय ने कहा कि कविता मनुष्य की मौन संवेदना की मुखर अभिव्यक्ति है और यही मनुष्यता की पहचान भी है। उन्होंने संस्था के 29 वर्षों के अखंड और अविराम साहित्यिक समर्पण की सराहना करते हुए कहा कि धारा चाहे जल की हो या काव्य की, उसका अटूट प्रवाह ही उसकी पहचान है।
मध्य प्रदेश साहित्य अकादमी के निदेशक डॉ. विकास दवे ने कहा कि “अखण्ड संडे” लंबे समय से अखण्ड साधना की तरह इस साहित्यिक अनुष्ठान को निरंतरता के साथ आगे बढ़ा रहा है, जो अत्यंत सराहनीय है।
संस्था के संस्थापक अध्यक्ष मुकेश इन्दौरी ने अपने उद्बोधन में कहा कि अखण्ड काव्य धारा न किसी कालखंड में ठहरती है और न किसी विचारधारा की सीमा में बंधती है। यह अतीत की स्मृति, वर्तमान की चुनौती और भविष्य की आशा को एक सूत्र में जोड़ने का कार्य करती है। उन्होंने कहा कि कविता को केवल पढ़ना ही नहीं, बल्कि जीना भी चाहिए; क्योंकि जब तक मनुष्य है, तब तक कविता है और जब तक कविता है, तब तक मनुष्यता की संवेदना सुरक्षित है।
ऑनलाइन लोकार्पण समारोह में डॉ. योगेन्द्रनाथ शुक्ल, डॉ. रमेश गुप्त मिलन, कार्तिकेय त्रिपाठी, अनिल ओझा, रमेशचंद्र शर्मा, डॉ. सुधा वशिष्ठ, ज्योति जैन, डॉ. शशिकला अवस्थी, आशा जाकड़, डॉ. शशि निगम एवं डॉ. दीपि गुप्ता सहित देश के विभिन्न प्रांतों के अनेक साहित्यकार उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन मुकेश इन्दौरी ने किया।
यह आयोजन साहित्य प्रेमियों के लिए एक प्रेरणास्पद क्षण रहा, जिसने काव्य की अखण्ड परंपरा को नई ऊर्जा प्रदान की।