०3 मार्च 2026 को साल का सबसे लंबा चंद्र ग्रहण, जानें भारत में समय और सूतक काल!
By Shubh Bhaskar ·
19 Feb 2026 ·
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०3 मार्च 2026 को साल का सबसे लंबा चंद्र ग्रहण, जानें भारत में समय और सूतक काल!
*नागपाल शर्मा माचाड़ी की रिपोर्ट*
(माचाड़ीअलवर):- दिल्ली- भारत में सूर्यग्रहण के बाद अब वर्ष 2026 का पहला और साल का सबसे लंबा चंद्र ग्रहण ०3 मार्च को लगने जा रहा है। हिंदू पंचांग के अनुसार यह चंद्र ग्रहण दोपहर से शाम तक रहेगा। उसी दिन रात्रि में होलिका दहन किया जाएगा और ०4 मार्च को होली का पर्व मनाया जाएगा। ज्योतिषीय गणना के अनुसार यह चंद्र ग्रहण पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र और सिंह राशि में घटित होगा।
बताया जा रहा है कि यह चंद्र ग्रहण भारत के कुछ हिस्सों में दिखाई देगा, इसलिए जहां-जहां यह दृश्य होगा, वहां सूतक काल भी मान्य रहेगा।
*कब से कब तक रहेगा चंद्र ग्रहण*?
भारतीय समयानुसार चंद्र ग्रहण ०3 मार्च को दोपहर ०3 बजकर 20 मिनट पर प्रारंभ होगा और शाम ०6 बजकर 47 मिनट पर समाप्त होगा। इस प्रकार ग्रहण की कुल अवधि ०3 घंटे 27 मिनट रहेगी।
चंद्र ग्रहण का सूतक काल ग्रहण शुरू होने से ०9 घंटे पूर्व लग जाता है। इस हिसाब से सूतक काल ०3 मार्च को सुबह ०6 बजकर 20 मिनट से प्रारंभ माना जाएगा।
*सूतक काल में क्या न करें*?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सूतक काल के दौरान—
पूजा-अर्चना और मंदिर में प्रवेश वर्जित माना जाता है।
देवी-देवताओं की मूर्तियों को स्पर्श नहीं करना चाहिए।
किसी भी प्रकार का शुभ या मांगलिक कार्य प्रारंभ नहीं किया जाता।
भोजन पकाना और ग्रहण करना निषिद्ध माना जाता है।
यात्रा से बचने की सलाह दी जाती है।
गर्भवती महिलाओं,बुजुर्गों, बच्चों और रोगियों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है।
भारत में कहां दिखेगा ग्रहण?
यह चंद्र ग्रहण भारत के उत्तर-पूर्वी हिस्सों में देखा जा सकेगा। पश्चिम बंगाल के उत्तर-पूर्वी क्षेत्रों सहित पूर्वोत्तर राज्यों जैसे मिजोरम,नागालैंड, मणिपुर,असम और अरुणाचल प्रदेश में इसके दिखाई देने की संभावना है।
ब्रजवासी गौ रक्षक सेना भारत संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष गौ पुत्र धर्म दास महाराज ने राष्ट्रीय वरिष्ठ मीडिया प्रभारी गौ पुत्र यादविन्द्र कुमार हिन्दू एवं राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी गौ पुत्र नागपाल शर्मा को यह जानकारी दी।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार ग्रहण समाप्ति के बाद स्नान-दान का विशेष महत्व बताया गया है। श्रद्धालुओं से अपील की गई है कि वे आस्था के साथ-साथ स्वास्थ्य संबंधी सावधानियों का भी पालन करें।