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मातृशक्ति से ही समाज और धर्म सुरक्षित : *महंत श्री जितेंद्र खेड़ापति*

By Shubh Bhaskar · 01 Feb 2026 · 29 views
मातृशक्ति से ही समाज और धर्म सुरक्षित : *महंत श्री जितेंद्र खेड़ापति*

*नागपाल शर्मा माचाड़ी की रिपोर्ट*

(माचाड़ीअलवर):- अलवर- विवेकानंद नगर बस्ती स्थित अय्यप्पा मंदिर (कंवल रिसोर्ट, जयपुर रोड) में रविवार को विराट हिंदू सम्मेलन का भव्य आयोजन किया गया। इस अवसर पर मातृशक्ति की ऐतिहासिक सहभागिता देखने को मिली, जहां 1100 से अधिक महिलाओं ने कलश यात्रा में भाग लेकर सनातन संस्कृति की सशक्त झलक प्रस्तुत की।
आयोजन समिति के सदस्य ओमप्रकाश शर्मा ने बताया कि मीणा मंदिर, विवेकानंद नगर सेक्टर-०4 से मातृशक्ति द्वारा भव्य कलश यात्रा निकाली गई। धर्म ध्वज पूजन के उपरांत डीजे की धुन पर सनातन संस्कृति व हिंदू समाज से जुड़े भजनों के साथ महिलाएं नृत्य करती हुई यात्रा में शामिल रहीं। यात्रा विवेकानंद नगर बस्ती से होती हुई अय्यप्पा मंदिर परिसर पहुंची। कलश यात्रा के मध्य भगवान श्रीराम की भव्य झांकी राम परिवार सहित आकर्षण का केंद्र रही।
कार्यक्रम में भारत माता के चित्र की विधिवत पूजा-अर्चना साधु-संतों एवं अतिथियों द्वारा की गई। इस दौरान संत शिरोमणि महंत श्री जितेंद्र खेड़ापति (त्रिपोलिया धाम), ब्रह्म मुनि महाराज (टोडली धाम),देवी शरण दास महाराज (कुरुक्षेत्र,हरियाणा),घनश्याम दासजी महाराज(मथुरा,उत्तर प्रदेश),राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के जिला प्रचारक एवं मुख्य बौद्धिक वक्ता रोहित कुमार तथा आयोजन समिति अध्यक्ष रामजी लाल मीणा उपस्थित रहे।
मंच पर भगवान श्रीराम,माता सीता,हनुमान जी एवं भ्राता लक्ष्मण सहित राम परिवार की भव्य प्रतिकृति विराजमान रही। संत प्रवचन सभा को संबोधित करते हुए महंत श्री जितेंद्र खेड़ापति ने कहा कि समाज और धर्म की सुरक्षा मातृशक्ति से ही संभव है। माताओं को अपने बच्चों में संस्कारों का बीजारोपण करना होगा तथा परिवार में धर्म व संस्कृति पर संवाद बढ़ाना होगा, तभी कुटुंब प्रबोधन संभव है और हिंदू समाज संगठित रहेगा।
ब्रह्म मुनि महाराज ने कहा कि हिंदू समाज की एकता से ही सनातन संस्कृति और भारत देश अखंड रह सकता है। घर और परिवार की मजबूती माताओं-बहनों के माध्यम से ही संभव है। वहीं जिला प्रचारक रोहित कुमार ने पंच परिवर्तन की अवधारणा पर प्रकाश डालते हुए कहा कि देश की समस्याओं का समाधान पंच परिवर्तन से ही संभव है, जिसमें मातृशक्ति की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।
उन्होंने कहा कि यह विवेकानंद नगर बस्ती के लिए ऐतिहासिक अवसर है, जब हजारों की संख्या में माताएं-बहनें कलश लेकर हिंदू सम्मेलन में सहभागी बनीं। उन्होंने परिवार में भोजन, भजन,भूषण (पहनावा) और पारिवारिक इतिहास व संस्कृति पर बच्चों से संवाद करने का आह्वान किया।

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