ग्रीन भारत की नन्ही आवाज: विराट हिन्दू सम्मेलन में श्रेया कुमावत का पर्यावरण संदेश, एवं मंच पर सम्मानित किया।
By Shubh Bhaskar ·
27 Jan 2026 ·
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ग्रीन भारत की नन्ही आवाज: विराट हिन्दू सम्मेलन में श्रेया कुमावत का पर्यावरण संदेश, एवं मंच पर सम्मानित किया।
शाहपुरा-राजेन्द्र खटीक।
शाहपुरा-विराट हिन्दू सम्मेलन में ‘ग्रीन लिटिल बेबी’ के नाम से प्रसिद्ध राजस्थान की बाल पर्यावरण प्रेमी श्रेया कुमावत ने पर्यावरण पर आधारित विशेष प्रदर्शनी लगाकर ग्रीन भारत, प्लास्टिक मुक्त जीवन और जैविक खेती का प्रभावशाली संदेश दिया। उनके इस कार्य ने सम्मेलन में उपस्थित हजारों लोगों का ध्यान आकर्षित किया।
प्रदर्शनी में श्रेया कुमावत ने वेस्ट प्लास्टिक थैलियों में फूल, सब्जियों एवं औषधीय पौधे लगाकर “वेस्ट टू बेस्ट” का जीवंत उदाहरण प्रस्तुत किया। साथ ही स्वयं निर्मित जैविक खाद, जैविक लिक्विड फर्टिलाइजर, सीड बॉल और प्राकृतिक कीटनाशकों के माध्यम से जैविक खेती का सरल, सस्ता और उपयोगी मॉडल प्रदर्शित किया। उन्होंने रासायनिक खाद और पेस्टिसाइड से मिट्टी एवं मानव स्वास्थ्य पर पड़ने वाले दुष्परिणामों को भी सरल शब्दों में समझाया।
इस अवसर पर सम्मेलन के मुख्य अतिथि प्रकाश दास जी महाराज ने श्रेया कुमावत को अपर्णा ओडाकर भारत माता की तस्वीर भेंट कर सम्मानित किया और उनके पर्यावरणीय कार्यों की खुले मंच से जमकर सराहना की। उन्होंने कहा कि इतनी कम उम्र में राष्ट्र, प्रकृति और आने वाली पीढ़ियों के लिए समर्पित होकर कार्य करना अत्यंत प्रेरणादायक है और समाज के लिए उदाहरण है।
प्रदर्शनी के दौरान श्रेया कुमावत ने वृक्षारोपण का संदेश देते हुए कहा
पेड़ हैं तो हम हैं।
उन्होंने प्रत्येक नागरिक से कम से कम एक पेड़ लगाने और उसकी देखभाल करने की अपील की।
उल्लेखनीय है कि श्रेया कुमावत राज्य के विभिन्न बड़े आयोजनों में लगातार पर्यावरण प्रदर्शनी लगाकर जन-जागरूकता फैला रही हैं। वे अब तक वरिष्ठ अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों से औपचारिक भेंट कर उन्हें ग्रीन एवं प्लास्टिक मुक्त भारत के संकल्प के साथ पौधा भेंट कर चुकी हैं। इस आयोजन में पर्यावरण क्षेत्र मे ठाकुर बाबा बस्ती द्वारा उन्हें मंच पर सम्मानित किया गया, जिससे उनके कार्यों को सामाजिक स्तर पर विशेष पहचान मिली।
इतनी अल्प आयु में पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में निरंतर सक्रिय श्रेया कुमावत आज एक नन्ही हरित क्रांतिकारी के रूप में उभर रही हैं, जिनका कार्य न केवल समाज बल्कि शासन-प्रशासन के लिए भी प्रेरणास्रोत बन रहा है।