ग्रीन लिटिल बेबी श्रेया कुमावत का हरित अभियान: जिले से लेकर मंत्रालय तक पहुँचा पौधा रोपण का संदेश।
By Shubh Bhaskar ·
24 Jan 2026 ·
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ग्रीन लिटिल बेबी श्रेया कुमावत का हरित अभियान: जिले से लेकर मंत्रालय तक पहुँचा पौधा रोपण का संदेश।
शाहपुरा-राजेन्द्र खटीक।
शाहपुरा-अब तक जिले के सभी वरिष्ठ अधिकारियों, विधायकों, सांसदों, कैबिनेट व केंद्रीय मंत्रियों को पौधा भेंट कर चुकी हैं बाल पर्यावरण प्रहरी श्रेया कुमावत
राजस्थान में पर्यावरण संरक्षण को एक व्यापक सामाजिक अभियान का रूप देते हुए “ग्रीन लिटिल बेबी के नाम से प्रसिद्ध बाल पर्यावरण प्रेमी श्रेया कुमावत निरंतर हरित राजस्थान का संदेश जन-जन और शासन-प्रशासन तक पहुँचा रही हैं।
श्रेया अब तक जिले के सभी वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों के साथ-साथ कई विधायकों, सांसदों, राज्य सरकार के कैबिनेट मंत्रियों एवं केंद्रीय मंत्रियों को पौधा भेंट कर पर्यावरण संरक्षण का संकल्प के साथ अपने द्वारा किये जा रहे कार्य के बारे मे सभी को अवगत करा चुकी हैं।
इसी क्रम में श्रेया कुमावत ने हाल ही में राजस्थान सरकार के कैबिनेट मंत्री जोराराम कुमावत, प्रदेश अध्यक्ष ओबीसी मोर्चा भाजपा डॉ. महेंद्र कुमावत, राष्ट्रीय कुमावत समाज अध्यक्ष रामेश्वर बंबोरिया, विधायक डॉ. लालाराम बेरवा एवं जिला अध्यक्ष प्रशांत मेवाड़ा सहित अनेक जनप्रतिनिधियों को बसंत पंचमी के अवसर पर एक सामाजिक कार्यक्रम में सभी को पौधा भेंट कर हरित राजस्थान अभियान को और गति प्रदान की।
श्रेया का यह प्रयास केवल प्रतीकात्मक नहीं, बल्कि प्लास्टिक प्रदूषण रोकथाम, जैव विविधता संरक्षण, जीव-जंतु सुरक्षा और भावी पीढ़ी के सुरक्षित पर्यावरण की दिशा में निरंतर जागरूकता अभियान है। इतनी कम उम्र में प्रशासनिक और राजनीतिक स्तर तक निरंतर संवाद स्थापित करना उन्हें एक विशिष्ट बाल पर्यावरण कार्यकर्ता के रूप में स्थापित करता है।
जनप्रतिनिधियों एवं अधिकारियों ने श्रेया कुमावत की सक्रियता को अनुकरणीय बताते हुए इसे प्रदेश के लिए गौरव का विषय बताया। सामाजिक संगठनों एवं पर्यावरण विशेषज्ञों ने मांग की है कि राज्य सरकार श्रेया कुमावत जैसे बाल पर्यावरण योद्धाओं को औपचारिक पहचान, राज्य स्तरीय सम्मान अथवा ‘बाल पर्यावरण ब्रांड एंबेसडर’ के रूप में दायित्व प्रदान करे।
आज “ग्रीन लिटिल बेबी” श्रेया कुमावत केवल एक बालिका नहीं, बल्कि प्रशासन, समाज और सरकार को जोड़ने वाली हरित चेतना की सशक्त आवाज़ बन चुकी हैं।अब आवश्यकता है कि राजस्थान सरकार इस अभियान को नीति स्तर पर समर्थन दे और इसे प्रदेशव्यापी आंदोलन का स्वरूप प्रदान करे।