मुस्लिम मस्जिदों से पत्थर गुंडागर्दी, दंगा फ़साद और कब्ज़े कर रहे हिंदू जाति जाति में बट गए
By Shubh Bhaskar ·
23 Jan 2026 ·
44 views
मुस्लिम मस्जिदों से पत्थर गुंडागर्दी, दंगा फ़साद और कब्ज़े कर रहे
हिंदू जाति जाति में बट गए
सुनील कुमार मिश्रा बद्री दैनिक शुभ भास्कर धर्म के नाम पर देश का बंटवारा हुआ मुसलमान को दो देश मिल गए लेकिन फिर भी हिंदुस्तान में रह गए यहां पर आतंकवादी गुंडागर्दी पत्थरबाजी और अपराध में रहकर अपना अधिकार समझते हैं सरकारों ने भी इनको खूब अनुदान दिया- उनके मदरसे बनवा दिए वफ्फ बोर्ड बनवा दिया उनके हित में कई कानून लागू कर दिए आज हमारे लिए दुख की बात बन रही है हम अपने मंदिर भी खाली नहीं करवा पा रहे हैं सेकुलर हिंदू भी 8/9 वर्ष पूर्व तक यह मानकर चलता था। अब मुसलमानों का संक्रमण गिरावट का काल शुरू हुआ है।
इस्लाम के जिस भार से बिना मतलब के हिंदुत्व का स्प्रिंग दबा हुआ था। मोदी जी ने आकर उसको एक एक कर के हटा दिया है।
जो भी परिवर्तन आप देख रहे हैं वह सब मोदी जनित राजनैतिक परिवर्तन है।
राम मंदिर, काशी विश्वनाथ, महाकाल कॉरिडोर, धारा 370, राष्ट्रीय सुरक्षा, सिटीज़न रजिस्टर, तीन तलाक़ पर रोक,
पाकिस्तान को तुरंत ईंट का जवाब पत्थर से देना... स्वतंत्र विदेश नीति...
उत्तरप्रदेश, मध्यप्रदेश, उत्तराखंड, राजस्थान छत्तीसगढ़ आसाम से लेकर पूर्वोत्तर के अन्य राज्यों में हिंदुवादी सरकारों की वापसी उस क्रांति के बड़े बिंदु हैं।
अजान के बदले हनुमान चालीसा, रामनवमी पर जुलूसों का संचालन, हनुमान जयंती पर मुस्लिम इलाक़ों में भी शोभा यात्रा निकालना, ट्रिपल तलाक़ की समाप्ति, विदेशी संस्थाओं का पंजीकरण रद्द होना...
श्रीलंका से ले कर अफगानिस्तान तक की भारत पर निर्भरता... उसी परिवर्तन के छोटे छोटे बिंदु हैं।
इस देश में इस्लाम का स्थायी अस्तित्व तभी तक रहेगा, जब तक मुसलमान होना फायदे का सौदा होगा।
जैसे जैसे मुसलमान होना घाटे का सौदा होता जाएगा। इस्लाम का अस्तित्व हिलने लगेगा।
जिनको देखकर आपको लगता है कि ये हिंदुत्व के दुश्मन हैं,
वही अपना पूर्वजों का हिन्दू DNA याद करके वापस हिंदू होने को तत्पर होंगे। हमारे ही हिन्दू समाज के स्वार्थी, डरपोक और कुछ मजबूर लोग उधर इस्लाम की तरफ गए थे।
फायदा दिखा तो उधर ही टिक गए।
वस्तुतः ये सुविधावादी और डरपोक लोगों का जमावड़ा है। ये आपको हिम्मती लग सकते हैं। पर ये हैं नहीं।
हाँ... ये घात लगाकर हमला करने वाले लोग हैं। आमने सामने नहीं... अपितु भीड़ ईकट्ठा करके लड़ने वाले लोग हैं।
हिंदुत्व किसी भी अनेकता वादी भटकाव से दूर रहा... तो यही लोग आपकी तरफ़ वापस आएँगे।
फिलहाल इनके भीतर की जेहादी आबादी, हिंदुस्तान और हिंदुओं की खुली दुश्मन है।
भय के बिना, यह प्रीति योग्य नहीं बनेंगे। यदि यह ये धमकी देते हैं कि हमारे 56 देश हैं...
तो यह याद रखिए की इनके सभी 56 देशों की कुल सेना और अस्त्र शस्त्र अकेले भारत की सेना और अस्त्र शस्त्र के बराबर के भी नहीं हैं।
और 56 में से एक भी देश इनको अपने देश में आने देना नहीं चाहते इसीलिए यह लोग पश्चिमी यूरोप अमेरिका के देशों में शरण लेना चाहते हैं।
फिर देखें तो इनके दुश्मन यहूदी और ईसाई भी हैं। धैर्य रखिए, छोटी छोटी बातों से घबराए नहीं। जो अपने हैं... उन्हें और अपना बनाइए।
जिस दिन इस देश में मुसलमान होना एक आशीर्वाद के बजाय मुकम्मल श्राप हो जाएगा, उसी दिन इन्हें अपना हिन्दू DNA याद आएगा।
इसलिए सभी एक रहिए, शक्तिशाली रहिये। हम वीर हैं और भी वीर और राष्ट्रवादी।
यह आज की तारीख में 21 करोड़ हैं और हम हिन्दू, सिख, जैन मिलाकर 112 करोड़ हैं। चार करोड़ इसाई भी अपनी हिंदू जड़ों को भूले नहीं हैं। वह भी हमारे साथ ही रहेंगे।
इनकी जनसंख्या की बढ़त अब कम होती जा रही है। हिंदुत्व मे विश्वास और मज़बूत करें। जाती ज्ञाती, पाति को तिलांजलि दे दें।
सनातन अमर है और अमर रहेगा।
हिंदुओं को जगाने का हम में से हर एक व्यक्ति बीड़ा उठाएं।