संचिना कला संस्थान के अभियान 'खेल-खेल में नाटक सीखो' के तहत बसंत पंचमी एवं नेताजी सुभाष चंद्र बोस जयंती पर भव्य कार्यक्रम
By Shubh Bhaskar ·
23 Jan 2026 ·
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संचिना कला संस्थान के अभियान 'खेल-खेल में नाटक सीखो' के तहत बसंत पंचमी एवं नेताजी सुभाष चंद्र बोस जयंती पर भव्य कार्यक्रम
शाहपुरा-राजेन्द्र खटीक।
शाहपुरा-बसंत पंचमी के पावन पर्व पर मां सरस्वती की कृपा एवं विद्या-बुद्धि की देवी के प्रति श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए संचिना कला संस्थान ने 'खेल-खेल में नाटक सीखो' अभियान के अंतर्गत ए1 टेक्नो माइंड स्कूल में एक अनुपम सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया। इस अवसर पर नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती मनाते हुए उनके क्रांतिकारी जीवन, त्यागमय संघर्ष एवं 'तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आजादी दूंगा' जैसे अमर नारों के माध्यम से राष्ट्रभक्ति की भावना को बच्चों के हृदयों में उतारने का सराहनीय प्रयास किया गया।
कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती की छवि पर दीप प्रज्वलन एवं माल्यार्पण से हुआ, उसके पश्चात् स्कूली बच्चों ने सरस्वती वंदना के माध्यम से वातावरण को ज्ञानमय बना दिया।
संचिना कला संस्थान के वरिष्ठ रंगकर्मी राम प्रसाद पारीक ने एकल अभिनय के माध्यम से छोटे-छोटे नाटकों का गुच्छा प्रस्तुत कर मां सरस्वती की अनुपम कृपा का गुणगान किया तथा नेताजी सुभाष चंद्र बोस के जीवन पर प्रकाश डाला। बसंत पंचमी को ज्ञान, संगीत एवं कला की देवी मां सरस्वती का अवतरण दिवस माना जाता है, जो वसंत ऋतु के आगमन के साथ नई ऊर्जा एवं सृजनात्मकता का संदेश देता है। वहीं, नेताजी सुभाष चंद्र बोस का जन्म 23 जनवरी 1897 को हुआ था, जिन्होंने आजाद हिंद फौज का गठन कर ब्रिटिश साम्राज्यवाद के विरुद्ध अटल संकल्प के साथ स्वतंत्रता संग्राम को नई दिशा प्रदान की।
कार्यक्रम की अध्यक्षता ए1 टेक्नो माइंड स्कूल के प्रधानाचार्य नव निधि राज सिंह राणावत ने की, जिन्होंने अपने प्रेरक उद्बोधन में कहा कि खेल-नाटक के सहज माध्यम से बच्चों को क्रांतिकारियों के जीवन से परिचित कराया जा सकता है।
स्कूल के छात्र-छात्राओं ने अंग्रेजी में सुभाष चंद्र बोस पर लेख एवं कविताएं पढ़कर सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया। कार्यक्रम का संचालन कुशलतापूर्वक जगदीश सिंह ने किया तथा अंत में सभी का धन्यवाद ज्ञापित किया।
संचिना कला संस्थान के इस आयोजन ने न केवल बच्चों में सांस्कृतिक चेतना जागृत की, अपितु बसंत पंचमी एवं नेताजी जयंती के संदेश को जीवंत रूप प्रदान किया।