ShubhBhaskar
SHUBHBHASKAR
E Paper

पत्रकारिता की साख पर संकट, छद्मवेशी पत्रकार बन रहे बड़ी चुनौती।

By Shubh Bhaskar · 22 Jan 2026 · 33 views
पत्रकारिता की साख पर संकट, छद्मवेशी पत्रकार बन रहे बड़ी चुनौती।

*नागपाल शर्मा माचाड़ी की रिपोर्ट*

(माचाड़ीअलवर):- दिल्ली:-
आज के दौर में पत्रकारिता की साख पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। पत्रकारिता जैसे जिम्मेदार और सम्मानित पेशे में छद्मवेशी पत्रकारों की बढ़ती संख्या ने असली और ईमानदार पत्रकारों की प्रतिष्ठा को गहरी ठेस पहुंचाई है। एक मोबाइल फोन और हाथ में माइक थामकर खुद को पत्रकार बताने का चलन तेजी से बढ़ा है, जिससे भ्रम और अविश्वास की स्थिति उत्पन्न हो रही है।
जानकारों का कहना है कि आज हर पांचवां या दसवां व्यक्ति स्वयं को पत्रकार बताने लगा है। इसका खामियाजा उन पत्रकारों को भुगतना पड़ रहा है, जो वर्षों से निष्पक्षता, निष्ठा और जिम्मेदारी के साथ इस पेशे से जुड़े हैं। छद्मवेशी पत्रकारों की तथाकथित ‘दुकानदार पत्रकारिता’ के कारण असली पत्रकार मन ही मन आहत हैं।
*क्या हैं छद्म पत्रकारिता के कारण*?
विशेषज्ञों के अनुसार छद्मवेशी पत्रकारों की बढ़ती संख्या के पीछे कई कारण हैं।
सबसे बड़ा कारण पत्रकारिता को सेवा नहीं, बल्कि कमाई का साधन समझना है। इसके अलावा सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव ने भी इस प्रवृत्ति को बढ़ावा दिया है। आज कोई भी व्यक्ति सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर वीडियो या पोस्ट डालकर स्वयं को पत्रकार घोषित कर देता है,
*बिना किसी प्रशिक्षण, मान्यता या जिम्मेदारी के।असली पत्रकारों की बढ़ती परेशानी*
ईमानदार और जिम्मेदार पत्रकारों का कहना है कि छद्मवेशी पत्रकारों के कारण उनकी वर्षों की मेहनत और विश्वसनीयता पर सवाल खड़े हो रहे हैं। गलत, भ्रामक और सनसनीखेज खबरों से समाज में पत्रकारिता की छवि धूमिल हो रही है, जिसका सीधा असर वास्तविक पत्रकारों पर पड़ रहा है।
*समाधान की दिशा में जरूरी कदम*
इस गंभीर समस्या से निपटने के लिए ठोस कदम उठाए जाने की आवश्यकता है।
पत्रकारों के लिए मजबूत और प्रभावी नियामक संस्था का गठन किया जाए।
पत्रकारिता के लिए मान्यता और पंजीकरण प्रणाली अनिवार्य की जाए।
सभी पत्रकारों के लिए आचार संहिता (कोड ऑफ कंडक्ट) लागू की जाए।
गलत पत्रकारिता करने वालों पर सख्त कार्यवाही सुनिश्चित हो।
*निष्कर्ष*
पत्रकारिता लोकतंत्र का चौथा स्तंभ है, लेकिन छद्मवेशी पत्रकारों की बढ़ती संख्या इस स्तंभ को कमजोर कर रही है। आवश्यकता है कि समाज, प्रशासन और स्वयं पत्रकार मिलकर इस पेशे की गरिमा को बचाने के लिए आगे आएं, ताकि पत्रकारिता पुनः एक सम्मानित और भरोसेमंद पेशा बन सके।

More News

Share News

WhatsApp

X

Facebook

Telegram

Instagram

YouTube