शाहपुरा-श्री प्र.सिं.बा.राजकीय महाविद्यालय शाहपुरा में महिला प्रकोष्ठ के तत्वाधान में स्थानीय महाविद्यालय में रंगोली प्रतियोगिता का आयोजन महिला प्रकोष्ठ प्रभारी नेहा जैन के दिशानिर्देशन में किया गया। कार्यक्रम के प्रारंभ में स्थानीय महाविद्यालय प्राचार्य डॉ. पुष्कर राज मीणा द्वारा बताया गया कि रंगोली का महत्व भारतीय संस्कृति में विशेष स्थान रखता है। यह कला, आस्था और सौंदर्य का सुंदर मेल है। रंगोली केवल सजावट नहीं, बल्कि आस्था, कला, संस्कृति और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक है, जो भारतीय परंपरा को जीवंत बनाए रखती है और भारतीय सांस्कृतिक विरासत को समृद्ध करती है। रंगोली में बने प्रतीक-कमल, स्वस्तिक, दीप, पत्तियाँ, ज्यामितीय आकृतियाँ-शुभ संकेत, समृद्धि और मंगलकामना को दर्शाते हैं। त्योहारों पर रंगोली बनाना सामूहिक गतिविधि होती है, जिससे परिवार और समाज में आपसी सहयोग, मेल-जोल और सामंजस्य बढ़ता है। वरिष्ठ संकाय सदस्य रामावतार मीणा ने रंगोली के सांस्कृतिक पहचान और परंपरा पर प्रकाश डाला और बताया की भारत के विभिन्न क्षेत्रों में रंगोली अलग-अलग नामों और शैलियों में प्रचलित है। दक्षिण भारत में कोलम, महाराष्ट्र में रंगोली, राजस्थान में मांडना, बंगाल में अल्पना आदि ये विविधताएँ भारत की सांस्कृतिक बहुलता और एकता को दर्शाती हैं। रंगोली के माध्यम से रंगों, आकृतियों और प्रतीकों का सौंदर्यपूर्ण संयोजन किया जाता है। यह लोक-कला रचनात्मकता, कल्पनाशक्ति और सौंदर्यबोध को विकसित करती है तथा पीढ़ी-दर-पीढ़ी कला परंपरा को आगे बढ़ाती है। कार्यक्रम मे श्री मूलचंद खटीक ने छात्राओं का मनोबल बढ़ाते हुए उत्साहवर्धन किया। कार्यक्रम के अंत मे प्राचार्य द्वारा रंगोली प्रतियोगिता के निर्णयों की घोषणा की गयी। रंगोली प्रतियोगिता में संयुक्त रूप से प्रथम गुड्डी कुमारी कुम्हार ( एम.ए. उत्तरार्द्ध हिन्दी) और सलीना बानो (एम.ए. पूर्वार्द्ध हिन्दी ) , द्वितीय इफ्तेखार फातिमा (एम.एससी पूर्वार्द्ध प्राणिशास्त्र) और तृतीय डाली कुमारी कुम्हार (एम.ए पूर्वार्द्ध भूगोल ) और नुसरत जहाँ (एम.एससी उत्तरार्द्ध प्राणिशास्त्र) संयुक्त रूप से रही। प्रतियोगिता में महाविद्यालय की नियमित छात्राओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। कार्यक्रम में महाविद्यालय परिवार के शैक्षणिक और अशैक्षणिक संकाय सदस्य उपस्थित रहे।