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माफिया के दुस्साहस ने ली ‘वीर’ की जान, बिलखता परिवार पूछ रहा— *“सरकार चुप क्यों*?” पूर्व केंद्रीय मंत्री भंवर जितेंद्र सिंह ने वन मंत्री संजय शर्मा से मृतक को शहीद का दर्जा, अनुकंपा नौकरी व मुआवजे की मांग की।

By Shubh Bhaskar · 13 Jan 2026 · 54 views
माफिया के दुस्साहस ने ली ‘वीर’ की जान, बिलखता परिवार पूछ रहा— *“सरकार चुप क्यों*?”
पूर्व केंद्रीय मंत्री भंवर जितेंद्र सिंह ने वन मंत्री संजय शर्मा से मृतक को शहीद का दर्जा, अनुकंपा नौकरी व मुआवजे की मांग की।

*नागपाल शर्मा माचाड़ी की रिपोर्ट*

(माचाड़ीअलवर):- राजस्थान के धौलपुर जिले में बजरी माफियाओं के बढ़ते दुस्साहस ने एक और वीर रक्षक की जान ले ली। सरमथुरा क्षेत्र के झिरी नाके पर तैनात वनकर्मी जितेंद्र सिंह शेखावत को अवैध खनन कर रहे ट्रैक्टर चालक ने कुचल दिया। गंभीर रूप से घायल जितेंद्र सिंह को जयपुर के अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां इलाज के दौरान उन्होंने दम तोड़ दिया।
रिटायर्ड फौजी और कर्तव्यनिष्ठ वनकर्मी जितेंद्र सिंह 22 राजपूताना राइफल्स रेजीमेंट के जांबाज रहे थे। केवल 20 महीने पहले ही वे वन विभाग में तैनात हुए थे। हमले में उनका बायां पैर बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया था, जिसे डॉक्टरों को काटना पड़ा, लेकिन अत्यधिक रक्तस्राव और गंभीर चोटों के कारण उन्हें बचाया नहीं जा सका।
उनके पीछे माता-पिता और दो पुत्र—अजय सिंह शेखावत व कुलदीप सिंह शेखावत—का बिलखता परिवार रह गया है। पिता प्रकाश सिंह शेखावत और गंभीर बीमारी से जूझ रही माता के लिए यह आघात अपूरणीय है।
घटना के विरोध में राजपूत समाज और वन कर्मचारी संगठनों ने मोर्चा खोल दिया है। अधीनस्थ वन कर्मचारी संघ ने 13 जनवरी को जयपुर स्थित अरण्य भवन में धरना-प्रदर्शन का आह्वान किया है, जिसे रेंजर एसोसिएशन का समर्थन प्राप्त है। संगठनों की मांग है कि वनकर्मियों को आधुनिक सुरक्षा उपकरण, पर्याप्त संसाधन और कार्य के अनुरूप सम्मानजनक वेतन दिया जाए। साथ ही शहीद के परिवार को समुचित मुआवजा और सरकारी नौकरी प्रदान की जाए।
राजपूत समाज के आग्रह पर पूर्व केंद्रीय मंत्री भंवर जितेंद्र सिंह ने वन मंत्री संजय शर्मा को पत्र लिखकर शहीद के आश्रितों को नौकरी और आर्थिक सहायता दिलाने की मांग की है। वन मंत्री संजय शर्मा ने मुख्य आरोपी की गिरफ्तारी और मामले की गहन जांच की जानकारी देते हुए शहीद परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की है तथा आश्वासन दिया है कि नियमानुसार समस्त सहायता और लाभ शीघ्र प्रदान किए जाएंगे।
*अब सबसे बड़ा सवाल यही है*—“जितेंद्र सिंह का क्या दोष था?” संसाधनों के अभाव में माफियाओं से जूझते हमारे वनकर्मी कब तक शहीद होते रहेंगे? समाज अब न्याय, सुरक्षा और सम्मान से कम कुछ भी स्वीकार करने को तैयार नहीं है।

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