भक्ति भाव से सराबोर भक्ति पर्व समागम का दिव्य आयोजन।
By Shubh Bhaskar ·
12 Jan 2026 ·
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भक्ति भाव से सराबोर भक्ति पर्व समागम का दिव्य आयोजन।
*नागपाल शर्मा माचाड़ी की रिपोर्ट*
(माचाड़ीअलवर):- राजगढ़- राजगढ़ भक्ति केवल शब्द नहीं, बल्कि जीवन जीने की एक सजग यात्रा है—यह प्रेरणादायक संदेश निरंकारी सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज ने हरियाणा स्थित संत निरंकारी आध्यात्मिक स्थल समालखा में आयोजित भक्ति पर्व समागम के पावन अवसर पर श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए दिया। इस दिव्य संत समागम में देश-विदेश से आए हजारों श्रद्धालु भक्तों ने सहभागिता करते हुए सत्संग के माध्यम से आध्यात्मिक आनंद एवं आत्मिक शांति की अनुभूति प्राप्त की।
इसी क्रम में राजगढ़ स्थित निरंकारी सत्संग भवन में भी भक्ति पर्व श्रद्धा एवं उत्साह के साथ मनाया गया। इस अवसर पर बड़ौदा मेव से पधारे ज्ञान प्रचारक मनोहर लाल ने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि भक्ति परमात्मा को जानकर ही की जा सकती है। निरंकार ही सत्य है। भक्ति निस्वार्थ सेवा है—यह कोई नाम या दिखावा नहीं, बल्कि अपने भीतर की सजग यात्रा है। सच्ची भक्ति तब होती है, जब हम आत्ममंथन द्वारा दूसरों से पहले स्वयं को जांचें, अपनी कमियों को सुधारें और हर पल जागरूक जीवन जिएं।
इस पावन अवसर पर परम संत संतोख सिंह सहित अन्य संत महापुरुषों के तप, त्याग एवं ब्रह्म ज्ञान के प्रचार-प्रसार में दिए गए अमूल्य योगदान का भावपूर्ण स्मरण किया गया।
समागम के दौरान अनेक वक्ताओं, कवियों एवं गीतकारों ने अपनी-अपनी विधाओं के माध्यम से गुरु महिमा, भक्ति भाव और मानव कल्याण के संदेशों को अत्यंत प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया, जिससे वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा से परिपूर्ण हो उठा।
निरंकारी मिशन का मूल सिद्धांत यही है कि भक्ति परमात्मा के तत्व को जानकर ही अपने वास्तविक एवं सार्थक स्वरूप को प्राप्त करती है। निस्संदेह, सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज के अमूल्य प्रवचनों ने श्रद्धालुओं को ब्रह्म ज्ञान के माध्यम से भक्ति के वास्तविक अर्थ को समझने तथा उसे अपने जीवन में अपनाने की प्रेरणा प्रदान की।