लूट का ‘सहारा’ और प्रशासन का ‘सन्नाटा’: सरकारी ड्यूटी छोड़ निजी अस्पतालों में व्यस्त डॉक्टरों पर उठे सवाल
By Shubh Bhaskar ·
21 Jul 2026 ·
49 views
लूट का ‘सहारा’ और प्रशासन का ‘सन्नाटा’: सरकारी ड्यूटी छोड़ निजी अस्पतालों में व्यस्त डॉक्टरों पर उठे सवाल
'सहारा नर्सिंग होम' के पर्चे में न पंजीकरण संख्या, न डॉक्टरों का विवरण; फायर सेफ्टी और वैधानिक मानकों पर भी सवाल, प्रशासन की चुप्पी चर्चा में
सम्वाददाता संतोष कुमार
बलरामपुर। जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था एक बार फिर सवालों के घेरे में है। सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति को लेकर लगातार उठ रही शिकायतों के बीच अब निजी अस्पतालों के संचालन और सरकारी चिकित्सकों की भूमिका पर भी गंभीर प्रश्न खड़े हो रहे हैं। शहर में संचालित 'सहारा नर्सिंग होम' को लेकर सामने आए तथ्यों ने स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली और प्रशासनिक निगरानी पर नई बहस छेड़ दी है।
बताया जा रहा है कि अस्पताल द्वारा मरीजों को दिए जा रहे पर्चों में न तो किसी प्रकार का पंजीकरण (रजिस्ट्रेशन) नंबर अंकित है और न ही उपचार करने वाले डॉक्टरों के नाम, योग्यता अथवा पंजीकरण संबंधी विवरण का उल्लेख है। पर्चे पर केवल तीन मोबाइल नंबर दर्ज हैं, जिससे अस्पताल की वैधानिक स्थिति और पारदर्शिता को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि जिले के कुछ सरकारी चिकित्सक अपनी नियमित सरकारी ड्यूटी के दौरान या उसके प्रभाव में निजी अस्पतालों और क्लीनिकों में अधिक समय दे रहे हैं। यदि इन आरोपों में सच्चाई है तो यह सरकारी सेवा नियमों और चिकित्सा आचार संहिता का गंभीर उल्लंघन माना जाएगा। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है और संबंधित चिकित्सकों का पक्ष भी सामने नहीं आया है।
इधर, हाल के दिनों में लखनऊ समेत प्रदेश के विभिन्न अस्पतालों में हुई अग्नि दुर्घटनाओं के बाद अस्पतालों की सुरक्षा व्यवस्था पर विशेष जोर दिया जा रहा है। ऐसे में यदि किसी अस्पताल के पंजीकरण और वैधानिक दस्तावेज ही स्पष्ट नहीं हैं, तो फायर सेफ्टी, बायो-मेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट और अन्य अनिवार्य मानकों के पालन को लेकर भी स्वाभाविक रूप से प्रश्न उठते हैं। इस संबंध में संबंधित विभागों द्वारा सार्वजनिक रूप से कोई जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई है।
स्वास्थ्य व्यवस्था से जुड़े जानकारों का कहना है कि निजी अस्पतालों का संचालन निर्धारित नियमों और मानकों के अनुरूप होना चाहिए। यदि कोई संस्था बिना आवश्यक अनुमतियों या निर्धारित प्रक्रियाओं का पालन किए संचालित हो रही है तो इसकी निष्पक्ष जांच कर आवश्यक कार्रवाई की जानी चाहिए। वहीं यदि सभी आवश्यक अनुमतियां मौजूद हैं तो संबंधित विभाग को भी स्थिति स्पष्ट कर भ्रम दूर करना चाहिए।
जिले में सरकारी अस्पतालों में इलाज के लिए आने वाले मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। ऐसे में यदि सरकारी चिकित्सकों की उपलब्धता प्रभावित होती है तो इसका सीधा असर आम मरीजों पर पड़ता है। इस पूरे मामले में स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन की ओर से अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या संबंधित विभाग इस मामले की निष्पक्ष जांच कर वास्तविक स्थिति जनता के सामने रखेगा, या फिर यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा। स्वास्थ्य जैसी संवेदनशील व्यवस्था में पारदर्शिता, जवाबदेही और नियमों का पालन सुनिश्चित करना प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है। जनता की निगाहें अब प्रशासनिक कार्रवाई और आधिकारिक जवाब पर टिकी हैं।