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आज से शुरू होंगे धनोप माता जी के आषाढ़ गुप्त नवरात्र, शुभ मुहूर्त में होगी घटस्थापना; जानिए पूजन विधि, शुभ योग और नौ दिनों का महत्व

By Shubh Bhaskar · 15 Jul 2026 · 20 views
आज से शुरू होंगे धनोप माता जी के आषाढ़ गुप्त नवरात्र, शुभ मुहूर्त में होगी घटस्थापना; जानिए पूजन विधि, शुभ योग और नौ दिनों का महत्व

शाहपुरा (भीलवाड़ा)-राजेन्द्र खटीक।

फुलिया कला-फुलिया कला के धनोप माता जी शक्ति उपासना के पावन पर्व आषाढ़ गुप्त नवरात्र का शुभारंभ आज 15 जुलाई 2026 से हो रहा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार आषाढ़ शुक्ल प्रतिपदा तिथि 14 जुलाई की दोपहर से प्रारंभ होकर 15 जुलाई की सुबह तक रहने के कारण 15 जुलाई को घटस्थापना की जाएगी और इसी दिन से गुप्त नवरात्र का आरंभ माना जाएगा। यह नौ दिवसीय पर्व 23 जुलाई 2026 को नवमी तिथि के साथ संपन्न होगा।
गुप्त नवरात्र को तंत्र, मंत्र और शक्ति साधना के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। इन नौ दिनों में मां दुर्गा के विभिन्न स्वरूपों की विधि-विधान से पूजा-अर्चना करने से साधक को विशेष आध्यात्मिक ऊर्जा, सुख-समृद्धि, शांति और मनोकामनाओं की पूर्ति का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
घटस्थापना का शुभ मुहूर्त
दृक पंचांग के अनुसार 15 जुलाई 2026 को घटस्थापना का शुभ समय प्रातः 06:01 बजे से 10:17 बजे तक रहेगा। इस अवधि में कलश स्थापना एवं मां दुर्गा की पूजा करना अत्यंत शुभ और फलदायी माना गया है।
आज बन रहे हैं विशेष शुभ योग
गुप्त नवरात्र के प्रथम दिन कई शुभ योग भी बन रहे हैं, जो पूजा-पाठ और साधना के लिए अत्यंत मंगलकारी माने गए हैं—

- ब्रह्म मुहूर्त: प्रातः 04:32 बजे से 05:16 बजे तक
- अमृत काल: सायं 04:00 बजे से 05:27 बजे तक
- विजय मुहूर्त: दोपहर 02:34 बजे से 03:25 बजे तक
इन शुभ मुहूर्तों में मां दुर्गा की आराधना करने से विशेष पुण्य फल प्राप्त होने की मान्यता है।
नौ दिनों में होगी मां के इन स्वरूपों की पूजा

- 15 जुलाई (प्रतिपदा): मां शैलपुत्री
- 16 जुलाई (द्वितीया): मां ब्रह्मचारिणी
- 17 जुलाई (तृतीया): मां चंद्रघंटा
- 18 जुलाई (चतुर्थी/पंचमी): मां कूष्मांडा एवं मां स्कंदमाता
- 19 जुलाई (षष्ठी): मां कात्यायनी
- 20 जुलाई (सप्तमी): मां कालरात्रि
- 21 जुलाई (अष्टमी): मां महागौरी
- 22–23 जुलाई (नवमी): मां सिद्धिदात्री
ऐसे करें मां दुर्गा की पूजा
गुप्त नवरात्र के दौरान श्रद्धालुओं को प्रातः स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करने चाहिए। पूजा स्थल की विधिवत सफाई कर मां दुर्गा का ध्यान करें और शुभ मुहूर्त में कलश स्थापना करें। इसके बाद दीपक जलाकर संभव हो तो अखंड ज्योति प्रज्वलित करें।
मां दुर्गा को पुष्प, अक्षत, रोली, चंदन, नैवेद्य, फल एवं सात्विक भोजन अर्पित करें। प्रतिदिन दुर्गा चालीसा, दुर्गा सप्तशती या देवी मंत्रों का श्रद्धापूर्वक पाठ करें। नौ दिनों तक नियम, संयम और श्रद्धा के साथ पूजा-अर्चना करते हुए अंत में मां दुर्गा की आरती करें तथा प्रसाद सभी भक्तों में वितरित करें।
गुप्त नवरात्र का धार्मिक महत्व
आषाढ़ गुप्त नवरात्र को साधना, तप, मंत्र-जप और देवी आराधना का विशेष पर्व माना जाता है। इस दौरान की गई पूजा से नकारात्मक शक्तियों का नाश, मानसिक शांति, आत्मबल, सुख-समृद्धि तथा आध्यात्मिक उन्नति प्राप्त होने की मान्यता है। देशभर के देवी मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना, दुर्गा सप्तशती पाठ और धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन किया जाएगा।

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