मदरसा नियुक्ति प्रकरण में बड़ा खुलासा: एक ही पद पर दो नियुक्तियों का मामला, विभागीय अनुमोदन पर उठे सवाल
By Shubh Bhaskar ·
08 Jul 2026 ·
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मदरसा नियुक्ति प्रकरण में बड़ा खुलासा: एक ही पद पर दो नियुक्तियों का मामला, विभागीय अनुमोदन पर उठे सवाल
RTI दस्तावेज, जांच रिपोर्ट और परिषद के आदेशों के आधार पर नियुक्ति प्रक्रिया की पारदर्शिता पर प्रश्न; वित्तीय अनुमोदन प्रणाली की निष्पक्ष जांच की मांग तेज
सम्वाददाता संतोष कुमार
उत्तर प्रदेश बलरामपुर। जनपद के राज्यानुदानित मदरसा जामिया अनवारुल उलूम, नई बाजार, तुलसीपुर में नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। सूचना का अधिकार (RTI) के तहत प्राप्त अभिलेखों, उत्तर प्रदेश मदरसा शिक्षा परिषद के आदेशों तथा विभागीय जांच रिपोर्ट के आधार पर यह मामला चर्चा में है। आरोप है कि एक ही रिक्त पद पर अलग-अलग समय में दो नियुक्तियों को विभागीय स्तर पर वित्तीय अनुमोदन प्रदान किया गया।
प्राप्त अभिलेखों के अनुसार वर्ष 2022 में सहायक अध्यापक (तहतानिया) के सेवानिवृत्त होने से रिक्त हुए पद पर हामिद रज़ा की नियुक्ति की गई थी। बताया गया है कि तत्कालीन जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी ने नियुक्ति पत्रावली की संस्तुति की थी तथा उत्तर प्रदेश मदरसा शिक्षा परिषद के तत्कालीन रजिस्ट्रार द्वारा उसी पद के सापेक्ष वित्तीय अनुमोदन भी जारी किया गया था।
मामले ने वर्ष 2025 में नया मोड़ तब लिया, जब उसी पद को पुनः रिक्त दर्शाते हुए मो. अहमद अंसारी की नियुक्ति की गई। उपलब्ध अभिलेखों के अनुसार इस नियुक्ति की भी जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी द्वारा संस्तुति की गई और परिषद स्तर से वित्तीय अनुमोदन प्रदान कर दिया गया।
यहीं से सबसे बड़ा सवाल उठता है कि यदि वर्ष 2022 में उसी पद पर नियुक्ति और वित्तीय अनुमोदन प्रभावी था, तो वर्ष 2025 में उसी पद को दोबारा रिक्त मानकर दूसरी नियुक्ति किस आधार पर स्वीकृत की गई? क्या रिक्त पदों का समुचित सत्यापन किया गया था या अनुमोदन प्रक्रिया में गंभीर प्रशासनिक चूक हुई?
विभागीय अभिलेखों के अनुसार 20 दिसंबर 2025 को जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी द्वारा किए गए औचक निरीक्षण में मो. अहमद अंसारी का नाम उपस्थिति पंजिका में दर्ज नहीं मिला। जांच रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया कि शिक्षकों और विद्यार्थियों ने उनके नियमित रूप से कार्यरत होने की पुष्टि नहीं की तथा उपलब्ध सीसीटीवी फुटेज में भी उनकी उपस्थिति संदिग्ध पाई गई। इसके बाद विभाग की ओर से नोटिस जारी किए गए और प्रकरण में एफआईआर दर्ज कर पुलिस जांच शुरू की गई।
उत्तर प्रदेश मदरसा शिक्षा परिषद द्वारा जारी आदेशों में जांच रिपोर्ट का उल्लेख करते हुए चयन प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताओं की बात कही गई है। रिपोर्ट में चयन समिति की बैठक के अभिलेख संदिग्ध या कूटरचित प्रतीत होने, नियुक्ति संबंधी दस्तावेजों में अनियमितता, कथित फर्जी उपस्थिति के आधार पर वेतन आहरण तथा आवश्यक अभिलेख उपलब्ध न कराए जाने जैसी टिप्पणियां दर्ज हैं। जांच रिपोर्ट में तत्कालीन प्रधानाचार्य मेराज अहमद तथा लिपिक अजीज अहमद की भूमिका पर भी सवाल उठाए गए हैं। हालांकि इन आरोपों की अंतिम पुष्टि सक्षम न्यायालय और विधिक प्रक्रिया के निष्कर्षों पर निर्भर करेगी।
जांच के बाद उत्तर प्रदेश मदरसा शिक्षा परिषद ने मो. अहमद अंसारी का वित्तीय अनुमोदन निरस्त करते हुए अब तक आहरित वेतन की वसूली, धनराशि राजकोष में जमा कराने तथा आवश्यक विभागीय एवं विधिक कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश जारी किए हैं।
इस पूरे प्रकरण में विभागीय जवाबदेही भी सवालों के घेरे में है। यदि वर्ष 2022 की नियुक्ति वैध थी, तो वर्ष 2025 में उसी पद पर दोबारा नियुक्ति की अनुमति कैसे दी गई? क्या विभागीय अभिलेखों का सत्यापन नहीं किया गया या अनुमोदन प्रक्रिया में गंभीर चूक हुई? चूंकि उपलब्ध अभिलेखों के अनुसार दोनों नियुक्तियां संस्था प्रबंधन द्वारा की गई थीं, इसलिए संस्था के प्रशासनिक संचालन और नियुक्ति प्रक्रिया पर भी प्रश्न उठ रहे हैं।
अधिकारी का पक्ष नहीं मिल सका
इस संबंध में जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी से उनका पक्ष जानने का प्रयास किया गया, लेकिन संपर्क नहीं हो सका और फोन का जवाब नहीं मिला। ऐसे में इस मामले पर उनका आधिकारिक पक्ष प्राप्त नहीं हो सका। पक्ष उपलब्ध होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।