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राजस्थान में पंचायत और निकाय चुनाव फिलहाल टले, आरक्षण के बाद भी चाहिए 90 दिन: *निर्वाचन आयोग*।

By Shubh Bhaskar · 08 Jul 2026 · 29 views
राजस्थान में पंचायत और निकाय चुनाव फिलहाल टले, आरक्षण के बाद भी चाहिए 90 दिन: *निर्वाचन आयोग*।

*नागपाल शर्मा माचाड़ी की रिपोर्ट*

(माचाड़ीअलवर):- जयपुर- राजस्थान में पंचायत और नगरीय निकाय चुनावों को लेकर बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। राज्य निर्वाचन आयोग ने स्पष्ट किया है कि मौजूदा परिस्थितियों में 31 जुलाई तक चुनाव कराना संभव नहीं है। आयोग ने पंचायती राज विभाग को भेजे पत्र में कहा है कि आरक्षण निर्धारण की अधिसूचना जारी होने के बाद भी चुनावी प्रक्रिया पूरी करने के लिए कम से कम 90 दिन का समय आवश्यक होगा।
इससे राजस्थान हाईकोर्ट द्वारा 31 जुलाई तक चुनाव कराने के निर्देशों का पालन होना फिलहाल मुश्किल दिखाई दे रहा है।
*आरक्षण तय होने के बाद ही आगे बढ़ेगी प्रक्रिया*
चुनाव कार्यक्रम में सबसे बड़ी बाधा अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) आरक्षण का निर्धारण है। पंचायती राज विभाग के अनुसार, ओबीसी आयोग अपनी रिपोर्ट 14 अगस्त तक सौंप सकता है। इसके बाद एससी, एसटी, ओबीसी और महिला वर्ग के लिए आरक्षण तय करने की प्रक्रिया अगस्त के अंत तक पूरी होने की संभावना है। यदि रिपोर्ट समय पर मिलती है तो 31 अगस्त तक आरक्षण निर्धारण पूरा किया जा सकता है, जिसके बाद ही चुनाव कार्यक्रम घोषित होगा।
*आयोग ने बताया क्यों लगेंगे 90 दिन*
निर्वाचन आयोग के अनुसार, सरकार द्वारा आरक्षण की अधिसूचना जारी होने के बाद *चुनाव संपन्न कराने में लगभग 90 दिन लगेंगे*।
पंचायत चुनाव कराने में लगभग 50 दिन।
नगरीय निकाय चुनावों में लगभग 40 दिन।
पंचायतों की संख्या बढ़ने और प्रशासनिक व्यवस्थाओं को देखते हुए पंचायत चुनाव चार चरणों में तथा निकाय चुनाव दो चरणों में कराए जाने की संभावना है।
*हाईकोर्ट ने दिए थे 31 जुलाई तक चुनाव कराने के निर्देश*
राजस्थान हाईकोर्ट की खंडपीठ ने 22 मई को राज्य सरकार और राज्य निर्वाचन आयोग को 31 जुलाई तक पंचायत एवं नगरीय निकाय चुनाव कराने के निर्देश दिए थे। सुनवाई के दौरान सरकार ने दिसंबर तक का समय मांगा था, लेकिन अदालत ने यह मांग स्वीकार नहीं की।
*अदालत की सख्त टिप्पणी*
हाईकोर्ट ने कहा था कि ओबीसी आयोग के गठन को एक वर्ष से अधिक समय हो चुका है, इसलिए आरक्षण निर्धारण में देरी चुनाव टालने का आधार नहीं बन सकती। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया था कि गर्मी या बारिश जैसे मौसम संबंधी कारण चुनाव कराने में बाधा नहीं माने जा सकते और चुनाव कराना सरकार की संवैधानिक जिम्मेदारी है।
*आगे क्या*?
यदि ओबीसी आयोग समय पर रिपोर्ट सौंप देता है और सरकार अगस्त के अंत तक आरक्षण प्रक्रिया पूरी कर लेती है, तो निर्वाचन आयोग के अनुमान के अनुसार पंचायत और नगरीय निकाय चुनाव सितंबर के बाद ही कराए जा सकेंगे। ऐसे में फिलहाल 31 जुलाई तक चुनाव होना संभव नहीं दिख रहा है। अब प्रदेश के लाखों मतदाताओं की नजर सरकार और निर्वाचन आयोग की अगली कार्रवाई तथा नई चुनावी समय-सारिणी पर टिकी हुई है।

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