राजगढ़ में 16 जुलाई को निकलेगी भगवान जगन्नाथ की ऐतिहासिक रथ यात्रा, 195 वर्ष पुराने गरुड़ रूपी विमान पर विराजमान होंगे प्रभु।
By Shubh Bhaskar ·
07 Jul 2026 ·
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राजगढ़ में 16 जुलाई को निकलेगी भगवान जगन्नाथ की ऐतिहासिक रथ यात्रा, 195 वर्ष पुराने गरुड़ रूपी विमान पर विराजमान होंगे प्रभु।
*नागपाल शर्मा माचाड़ी की रिपोर्ट*
(माचाड़ीअलवर):-राजगढ़-
राजगढ चौपड़ बाजार स्थित श्री जगन्नाथ मंदिर से 16 जुलाई को भगवान श्री जगन्नाथ की ऐतिहासिक रथ यात्रा पूरे धार्मिक रीति-रिवाज और भव्यता के साथ निकाली जाएगी। इस वर्ष भगवान जगन्नाथ लगभग 195 वर्ष पुराने गरुड़ रूपी विमान (रथ) पर विराजमान होकर नगर भ्रमण करेंगे। मंदिर प्रशासन के अनुसार इस प्राचीन रथ को जगन्नाथ पुरी की तर्ज पर विशेष रूप से सजाया जा रहा है।
मंदिर के महंत पूर्ण दास, एडवोकेट मदन मोहन शास्त्री एवं पंडित रोहित शर्मा ने बताया कि जगन्नाथ पुरी के बाद अलवर जिले की राजगढ़ तहसील में भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा का विशेष धार्मिक एवं ऐतिहासिक महत्व है। वर्ष 1855 में महंत केशव दास महाराज के नेतृत्व में पहली रथ यात्रा निकाली गई थी और तब से यह परंपरा निरंतर चली आ रही है। वहीं, गरुड़ रूपी यह प्राचीन रथ लगभग 195 वर्ष पूर्व जगन्नाथ पुरी से आए कारीगरों द्वारा निर्मित कराया गया था।
उन्होंने बताया कि पूर्व समय में रथ यात्रा में हाथी, घोड़े, कच्ची घोड़ी, बम-रसिया नृत्य, पलटन और बैंड प्रमुख आकर्षण होते थे। समय के साथ यात्रा का स्वरूप और अधिक भव्य एवं आकर्षक बनाया गया है। इस वर्ष भी मेला समिति और मंदिर प्रशासन यात्रा को भव्य रूप देने की तैयारियों में जुटे हुए हैं।
गंगा बाग स्थित श्री जगन्नाथ मंदिर का इतिहास भी दो शताब्दियों से अधिक पुराना है। बताया जाता है कि अलवर नरेश महाराजा शिवदान सिंह ने गंगा बाग और मंदिर परिसर को भगवान जगन्नाथ के मेले एवं रथ यात्रा के लिए समर्पित किया था। वर्तमान में महंत पूर्ण दास, पंडित मदन मोहन शास्त्री और पंडित रोहित शर्मा महंत परंपरा की दसवीं पीढ़ी के रूप में मंदिर की सेवा-पूजा का दायित्व निभा रहे हैं।
*जगन्नाथ पुरी की परंपरा का होता है पालन*
मंदिर महंतों ने बताया कि राजगढ़ की रथ यात्रा में जगन्नाथ पुरी की परंपराओं का पूर्ण रूप से पालन किया जाता है। रथ यात्रा से 15 दिन पूर्व भगवान जगन्नाथ का 108 जल कलश एवं पंचामृत से अभिषेक किया जाता है। इसके बाद भगवान 15 दिनों तक अनासार काल में विश्राम करते हैं, जहां औषधीय काढ़े से उनका उपचार किया जाता है।
आषाढ़ शुक्ल प्रतिपदा को भगवान गर्भगृह से बाहर विराजमान होते हैं। इसी दिन नेत्र उत्सव आयोजित होता है तथा शाम को माता जानकी की सवारी श्री जगन्नाथ मंदिर पहुंचती है, जहां गणेश पूजन और मंदिर मार्जन का कार्यक्रम संपन्न होता है।
*विशेष श्रृंगार और वरमाला महोत्सव*
16 जुलाई को भगवान जगन्नाथ को दूल्हे के रूप में विशेष वृंदावन की शाही पोशाक पहनाई जाएगी। साथ ही जयपुर का शाही मोगरा और सऊदी अरब का विशेष इत्र अर्पित किया जाएगा। 20 जुलाई को आयोजित होने वाले भगवान जगन्नाथ एवं माता जानकी के वरमाला महोत्सव के लिए विशेष पुष्पमालाएं दिल्ली और हरियाणा से मंगवाई जा रही हैं।
*जनप्रतिनिधि भी होंगे शामिल*
मंदिर प्रशासन के अनुसार रथ यात्रा में केंद्रीय जल शक्ति एवं पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव तथा राजस्थान सरकार के वन एवं पर्यावरण मंत्री संजय शर्मा सहित अनेक जनप्रतिनिधि, संत-महात्मा और बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल होंगे। यह ऐतिहासिक रथ यात्रा राजगढ़ की धार्मिक एवं सांस्कृतिक विरासत का प्रमुख आयोजन मानी जाती है।