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फर्जी हस्ताक्षरों के आरोप में रसद विभाग के तीन प्रवर्तन निरीक्षकों पर एफआईआर

By Shubh Bhaskar · 07 Jul 2026 · 38 views
फर्जी हस्ताक्षरों के आरोप में रसद विभाग के तीन प्रवर्तन निरीक्षकों पर एफआईआर
शाहपुरा न्यायालय के आदेश पर दर्ज हुआ मामला, कूटरचित निरीक्षण दस्तावेज तैयार करने का आरोप; पुलिस जांच शुरू

शाहपुरा (भीलवाड़ा)-राजेन्द्र खटीक।

फूलियाकलां-उपखंड क्षेत्र के ग्राम खामोर की उचित मूल्य की दुकान के निरीक्षण से जुड़ा विवाद अब आपराधिक मुकदमे में बदल गया है। न्यायिक मजिस्ट्रेट शाहपुरा के आदेश पर रसद विभाग के प्रवर्तन निरीक्षक मीनाक्षी मीणा, विनोद मीणा एवं ब्रिजेश सेठी के विरुद्ध फूलियाकलां थाने में भारतीय न्याय संहिता की धाराओं 198, 201, 318(3), 336(3)(4) एवं 339(1) के तहत एफआईआर दर्ज कर अनुसंधान शुरू कर दिया गया है।
परिवादी ओमप्रकाश वैष्णव, उचित मूल्य की दुकान खामोर के लाइसेंसधारी डीलर हैं। उनका आरोप है कि 29 अक्टूबर 2025 को निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने मौके पर तैयार किए गए दस्तावेजों पर उनके हस्ताक्षर करवाए, लेकिन बाद में उन्हीं दस्तावेजों में कथित कूटरचना कर नए फर्द मौका एवं निरीक्षण प्रपत्र तैयार किए गए। आरोप है कि इन दस्तावेजों पर उनके साथ-साथ गवाह बलवंत सिंह और कन्हैयालाल व्यास उर्फ सिंटू के भी फर्जी हस्ताक्षर किए गए।
परिवादी के अनुसार जिला कलेक्टर के हस्तक्षेप के बाद 21 नवंबर को दस्तावेजों की प्रमाणित प्रतियां मिलने पर कथित जालसाजी का खुलासा हुआ। पुलिस और उच्च अधिकारियों से शिकायत पर कार्रवाई नहीं होने के बाद उन्होंने न्यायालय का दरवाजा खटखटाया। परिवादी ने निजी दस्तावेज परीक्षण प्रयोगशाला, जयपुर से कराई गई हस्ताक्षर जांच (एफएसएल) रिपोर्ट भी न्यायालय में प्रस्तुत की, जिसमें विवादित हस्ताक्षरों को मूल हस्ताक्षरों से भिन्न बताया गया।
लोकसेवकों से जुड़े मामले में न्यायालय ने पहले विभागीय रिपोर्ट मंगाई। विभाग ने अपनी रिपोर्ट में राशन दुकान संचालन में अनियमितताओं का उल्लेख करते हुए बताया कि परिवादी को कारण बताओ नोटिस जारी कर बाद में लाइसेंस निलंबित किया गया। वहीं तीनों प्रवर्तन निरीक्षकों ने न्यायालय में कहा कि निरीक्षण के दौरान परिवादी ने आवश्यक अभिलेख उपलब्ध नहीं कराए और बाद में फर्द मौका रिपोर्ट छीनकर फाड़ने का प्रयास किया। उन्होंने यह भी दावा किया कि परिवादी के विरुद्ध पहले से दर्ज एफआईआर के कारण यह परिवाद दुर्भावनावश प्रस्तुत किया गया।
दोनों पक्षों के परस्पर विरोधी दावों, एफएसएल रिपोर्ट तथा उपलब्ध रिकॉर्ड का परीक्षण करने के बाद न्यायालय ने मामले को जटिल प्रकृति का मानते हुए भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 175(3) के तहत एफआईआर दर्ज कर पुलिस अनुसंधान के निर्देश दिए। मामले की जांच थानाधिकारी राजकुमार नायक को सौंपी गई है। उधर, मुख्यमंत्री कार्यालय में भी शिकायत पहुंचने के बाद खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग से तथ्यात्मक रिपोर्ट तलब की गई है तथा विभाग ने जांच के लिए संबंधित दस्तावेज जयपुर मंगवाए हैं।

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