वीबी जीरामजी योजना से मनरेगा पर संकट, सरकार पुनर्विचार करे : *सीपीआई*
By Shubh Bhaskar ·
29 Jun 2026 ·
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वीबी जीरामजी योजना से मनरेगा पर संकट, सरकार पुनर्विचार करे : *सीपीआई*
*नागपाल शर्मा माचाड़ी की रिपोर्ट*
(माचाड़ीअलवर):-अलवर-
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीआई) एवं जिला एटक ने संयुक्त बयान जारी कर केंद्र सरकार की प्रस्तावित वीबी जीरामजी योजना पर गंभीर चिंता व्यक्त की है। संगठन का कहना है कि सरकार मनरेगा कानून के स्थान पर नई योजना लागू कर मनरेगा को धीरे-धीरे समाप्त करने की दिशा में बढ़ रही है।
बयान में कहा गया कि जिस आधार पर सीपीआई और एटक ने इस योजना का विरोध किया था, अब उन्हीं मुद्दों पर कई राज्य सरकारों ने भी सवाल उठाए हैं। विशेष रूप से बिहार, मध्यप्रदेश और उत्तराखंड सरकारों ने योजना की पुनः समीक्षा की मांग की है।
संगठन के अनुसार नई योजना में 125 दिनों के रोजगार का प्रावधान किया गया है, जबकि योजना के खर्च में केंद्र सरकार की 60 प्रतिशत और राज्य सरकारों की 40 प्रतिशत भागीदारी प्रस्तावित है। इसके अलावा कृषि सीजन में 60 दिनों का ब्लैकआउट पीरियड, लंबित भुगतान तथा अन्य प्रावधानों पर राज्यों ने केंद्र सरकार को सुझाव और आपत्तियां भेजी हैं। कई राज्यों ने 40 प्रतिशत अंशदान देने में कठिनाई जताई है, जबकि उत्तराखंड सरकार ने मजदूरी का पूरा खर्च केंद्र सरकार द्वारा वहन किए जाने की मांग की है। राज्यों ने न्यूनतम मजदूरी बढ़ाने तथा मनरेगा के लंबित भुगतानों के शीघ्र भुगतान की भी मांग उठाई है।
सीपीआई एवं जिला एटक ने कहा कि वे लंबे समय से मनरेगा मजदूरों को वर्ष में 200 दिनों का रोजगार तथा 600 रुपये प्रतिदिन न्यूनतम मजदूरी दिए जाने की मांग करते आ रहे हैं।
संगठन ने मनरेगा मजदूरों से आह्वान किया कि वे मनरेगा योजना को मजबूत बनाए रखने, 200 दिनों के रोजगार तथा 600 रुपये प्रतिदिन मजदूरी की मांग को लेकर संघर्ष को और तेज करें।