अंधेरे में डूबा सन्निहित सरोवर: लाइटें बंद, फाउंटेन ठप, सफाई गायब — रात होते ही असामाजिक तत्वों का अड्डा बनने का आरोप
By Shubh Bhaskar ·
03 Jan 2026 ·
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अंधेरे में डूबा सन्निहित सरोवर: लाइटें बंद, फाउंटेन ठप, सफाई गायब — रात होते ही असामाजिक तत्वों का अड्डा बनने का आरोप
दैनिक शुभ भास्कर हरियाणा कुरुक्षेत्र अरविंद शर्मा कुरुक्षेत्र।
धर्मनगरी कुरुक्षेत्र की पहचान माने जाने वाला विश्वविख्यात सन्निहित सरोवर आज बदहाली, अव्यवस्था और प्रशासनिक उदासीनता का शिकार होता नजर आ रहा है। सरोवर परिसर में लगी अधिकांश लाइटें लंबे समय से बंद या टूटी पड़ी हैं, फाउंटेन पूरी तरह ठप हैं और सफाई व्यवस्था लगभग नदारद है। हालात यह हैं कि पवित्र सरोवर अब आस्था से ज्यादा अंधेरे और गंदगी के लिए जाना जाने लगा है।
स्थानीय लोगों के अनुसार, रात होते ही सरोवर परिसर में अंधेरा छा जाता है, जिसका फायदा उठाकर शराबी व असामाजिक तत्व खुलेआम उत्पात मचाते हैं। आरोप है कि अंधेरे का लाभ उठाकर कुछ लोग नशे की हालत में जुआ खेलते हैं, शोर-शराबा करते हैं और माहौल को असुरक्षित बना देते हैं, जिससे श्रद्धालुओं, महिलाओं और पर्यटकों का यहां आना-जाना मुश्किल हो गया है।
सबसे चिंताजनक बात यह है कि सन्निहित सरोवर जैसे महत्वपूर्ण सार्वजनिक स्थल पर लाइटिंग, फाउंटेन और मेंटेनेंस के लिए समय-समय पर टेंडर जारी किए जाने की जानकारी तो है, लेकिन धरातल पर काम शून्य नजर आता है। सवाल यह उठता है कि यदि टेंडर दिए गए हैं और भुगतान हो रहा है, तो फिर व्यवस्थाएं क्यों नहीं सुधर रहीं?
सरोवर परिसर में फैला कूड़ा-कचरा, बदबू और टूटी हुई सुविधाएं प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर रही हैं। जानकारों का कहना है कि यह केवल लापरवाही नहीं, बल्कि सार्वजनिक धन के दुरुपयोग और जिम्मेदारी से बचने का मामला भी हो सकता है।
स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि कई बार शिकायतें उठने के बावजूद किसी अधिकारी या जिम्मेदार एजेंसी द्वारा स्थायी समाधान नहीं किया गया। न तो लाइटें दुरुस्त की गईं, न फाउंटेन चालू हुए और न ही नियमित सफाई की व्यवस्था की गई।
अब मांग उठ रही है कि जिला प्रशासन और कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड इस मामले को हल्के में लेने के बजाय उच्चस्तरीय जांच कराए, सभी लाइटिंग, फाउंटेन, मेंटेनेंस और सफाई से जुड़े टेंडरों की वास्तविक स्थिति सार्वजनिक करे, दोषी अधिकारियों और ठेकेदारों की जवाबदेही तय करे और सन्निहित सरोवर को दोबारा सुरक्षित एवं स्वच्छ बनाया जाए।
यदि जल्द ठोस कार्रवाई नहीं हुई, तो यह पवित्र स्थल अंधेरे, अव्यवस्था और असामाजिक गतिविधियों का स्थायी केंद्र बनता चला जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी संबंधित विभागों और प्रशासन पर होगी।