नर्मदा भक्ति और शिप्रा मोक्ष की प्रतीक : संत श्री हरि नारायण शास्त्री।
By Shubh Bhaskar ·
23 May 2026 ·
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नर्मदा भक्ति और शिप्रा मोक्ष की प्रतीक : संत श्री हरि नारायण शास्त्री।
*नागपाल शर्मा माचाड़ी की रिपोर्ट*
(माचाड़ीअलवर):- उज्जैन- मां नर्मदा त्याग,तपस्या और भक्ति की प्रतीक हैं, जबकि मां शिप्रा मोक्ष प्रदान करने वाली पुण्य सलिला मानी जाती हैं। आदि शंकराचार्य जी ने मां नर्मदा के तट पर श्री गोविंद भगवत पाद गुरु से दीक्षा प्राप्त कर कठोर तपस्या की थी और सनातन धर्म की स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वहीं मां शिप्रा मानव जीवन को मोक्ष के माध्यम से मुक्ति प्रदान करने वाली पवित्र धारा है।
यह उद्गार संत श्री हरि नारायण शास्त्री ने बांके बिहारी आश्रम उज्जैन द्वारा ओंकारेश्वर में मां नर्मदा के तट स्थित परिक्रमा मार्ग पर आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के दौरान श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए व्यक्त किए।
कथा के दौरान श्रद्धालुओं ने भक्ति भाव से कथा श्रवण किया तथा मां नर्मदा की महिमा का गुणगान किया। इस अवसर पर अखिल भारतीय ब्राह्मण समाज के राष्ट्रीय अध्यक्ष पंडित सुरेंद्र चतुर्वेदी, पंडित संजय चतुर्वेदी, कमल भावसार, प्रेम राठौर, पुरोहित महासभा प्रदेश अध्यक्ष एवं पूर्व नगरपालिका अध्यक्ष जयप्रकाश पुरोहित, श्री सत्य साई सेवा समिति उज्जैन शहरज्ञम अध्यक्ष शरद सिंह चौहान, दिनेश आंजना तथा शैलेंद्र यादव सहित अनेक श्रद्धालु उपस्थित रहे।
सभी अतिथियों ने मां नर्मदा को चुनरी अर्पित कर विधि-विधान से पूजन-अर्चन किया तथा श्रीमद्भागवत कथा की आरती में शामिल होकर धर्म लाभ प्राप्त किया। इस अवसर पर उपेंद्रनाथ त्रिपाठी, बाबा पंडित त्रिलोक तिवाड़ी,अरविंद उपाध्याय सहित अनेक लोग मौजूद रहे।