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मदर्स डे पर बोले डॉ. सुरेश चंद शर्मा — मां की ममता ही सबसे बड़ी ताकत।

By Shubh Bhaskar · 10 May 2026 · 14 views
मदर्स डे पर बोले डॉ. सुरेश चंद शर्मा — मां की ममता ही सबसे बड़ी ताकत।

*नागपाल शर्मा माचाड़ी की रिपोर्ट*

(माचाड़ीअलवर):-जयपुर- जयपुर मातृ दिवस हर वर्ष मई माह के दूसरे रविवार को पूरे विश्व में मां के सम्मान और आदर के प्रतीक के रूप में मनाया जाता है। इस अवसर पर सर्व समाज जागृति संघ के संस्थापक अध्यक्ष व बृजवासी गौरक्षक सेना भारत संघ के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और अखिल भारतीय संयुक्त ब्राह्मण समन्वय समिति के राष्ट्रीय प्रवक्ता डॉ. सुरेश चंद शर्मा ने कहा कि मां हमारे जीवन की पहली गुरु होती है, जो हमें प्रेम, संस्कार और जीवन जीने की सीख देती है। उन्होंने कहा कि भगवान हर जगह उपस्थित नहीं हो सकते, इसलिए उन्होंने मां का स्वरूप बनाया।
डॉ. शर्मा ने कहा कि मां जन्म से लेकर जीवन के हर पड़ाव तक अपने बच्चों का निस्वार्थ भाव से साथ निभाती है। मां का प्रेम ऐसा अनमोल फूल है जो कभी मुरझाता नहीं। उन्होंने कहा कि वैसे तो जीवन का हर दिन माता-पिता को समर्पित होता है, लेकिन मातृ दिवस हमें अपनी मां के प्रति कृतज्ञता, सम्मान और प्रेम व्यक्त करने का विशेष अवसर प्रदान करता है।
उन्होंने कहा कि एक मां बिना किसी अपेक्षा के अपना पूरा जीवन अपने बच्चों के लिए समर्पित कर देती है और केवल उनके प्रेम की आकांक्षा रखती है। मां और संतान का रिश्ता सबसे पवित्र, पारदर्शी और निस्वार्थ होता है। परिस्थिति कैसी भी हो, मां अपने बच्चों का साथ अंतिम सांस तक नहीं छोड़ती।
डॉ. शर्मा ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि आधुनिक समय में कुछ लोग अपने माता-पिता का महत्व नहीं समझते और उन्हें वृद्धाश्रम भेज देते हैं, जो भारतीय संस्कृति के विरुद्ध और अत्यंत निंदनीय कार्य है। उन्होंने कहा कि संतान को कभी नहीं भूलना चाहिए कि उनका अस्तित्व माता-पिता की वजह से है। गरुड़ पुराण का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि माता-पिता का अपमान करने वालों को जीवन में कष्टों का सामना करना पड़ता है।
उन्होंने समाज से अपील करते हुए कहा कि माता-पिता हमारे प्रथम देवता हैं। उनकी सेवा, सम्मान और प्रेम करना प्रत्येक संतान का परम धर्म है, क्योंकि माता-पिता का आशीर्वाद ही जीवन की सबसे बड़ी पूंजी और सफलता का आधार होता है। और दूसरा सम्मान गौ माता का है जिनके अंग में भी 33 कोटी देवी देवताओं का वास रहता है वह भी मानव जीव का दुध पिलाकर लालन-पालन करती है उसे भी मां के रूप में ही पूजा जाता है। इसीलिए मां का नाम सर्वोपरि है जो मातृ दिवस के रूप में मनाया जाता है।

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