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आईवीएफ सेंटरों में अनियमितताओं पर चिकित्सा विभाग सख्त, उदयपुर के दो सेंटरों का पंजीकरण निलंबित।

By Shubh Bhaskar · 06 May 2026 · 11 views
आईवीएफ सेंटरों में अनियमितताओं पर चिकित्सा विभाग सख्त, उदयपुर के दो सेंटरों का पंजीकरण निलंबित।


*नागपाल शर्मा माचाड़ी की रिपोर्ट*

(माचाड़ीअलवर):- जयपुर- राज्य सरकार ने प्रदेश में संचालित आईवीएफ सेंटरों में पारदर्शिता, वैधानिक अनुपालन और नैतिक मानकों को सुनिश्चित करने के लिए सख्त रुख अपनाया है। अंडों की अवैध खरीद-फरोख्त से जुड़ी शिकायतों पर त्वरित संज्ञान लेते हुए चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग ने सघन जांच अभियान चलाया है। जांच के दौरान गंभीर अनियमितताएं पाए जाने पर उदयपुर के दो आईवीएफ सेंटरों का पंजीकरण तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है।
चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की प्रमुख शासन सचिव श्रीमती गायत्री राठौड़ ने बताया कि उदयपुर जिले में आईवीएफ सेंटरों के खिलाफ मिली शिकायतों के आधार पर राज्य स्तर पर एआरटी एवं सरोगेसी के नोडल अधिकारी की अध्यक्षता में विशेष टीम गठित की गई। साथ ही जिले के सभी पंजीकृत आईवीएफ सेंटरों की जांच के लिए तीन अलग-अलग टीमों द्वारा औचक निरीक्षण कराया गया। निरीक्षण के दौरान कुल 28 केंद्रों की जांच की गई।
राज्य स्तरीय टीम ने ०2 मई 2026 को उदयपुर स्थित अमर आशीष हॉस्पिटल एवं आईवीएफ सेंटर का निरीक्षण किया। जांच के दौरान एआरटी बैंक, एआरटी क्लिनिक (लेवल-०2) और सरोगेसी क्लिनिक से संबंधित दस्तावेजों में गंभीर कमियां सामने आईं। इसके चलते संबंधित इकाइयों का पंजीकरण तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया।
इसी प्रकार निरीक्षण के दौरान सम्पत एआरटी बैंक, उदयपुर में भी कई अनियमितताएं पाई गईं, जिसके चलते उसका पंजीकरण भी अग्रिम आदेशों तक निलंबित कर दिया गया है। अन्य आईवीएफ केंद्रों के दस्तावेजों की जांच अभी जारी है।
अनियमितताओं पर होगी कठोर कार्यवाही
प्रमुख शासन सचिव ने स्पष्ट किया कि एआरटी विनियमन अधिनियम, 2021 एवं सरोगेसी विनियमन अधिनियम के प्रावधानों का उल्लंघन किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है। आमजन के स्वास्थ्य और अधिकारों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और किसी भी प्रकार की लापरवाही या अनियमितता पर सख्त कार्यवाही की जाएगी।
नियमित निरीक्षण की व्यवस्था
विभाग ने राज्यभर में पंजीकृत एआरटी बैंक, एआरटी क्लिनिक और सरोगेसी क्लिनिकों का नियमित निरीक्षण सुनिश्चित करने का निर्णय लिया है। इसका उद्देश्य सभी संस्थानों में निर्धारित मानकों और कानूनी प्रावधानों का पूर्ण पालन सुनिश्चित करना है। सरकार ने स्वास्थ्य सेवाओं में पारदर्शिता, जवाबदेही और गुणवत्ता बनाए रखने के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है।

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