बूढ़ादीत में 'सफेदपोश' तस्करों ने उजाड़ा जंगल, कुंभकर्णी नींद में सोया कोटा का वन विभाग!
By Shubh Bhaskar ·
04 May 2026 ·
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दैनिक शुभ भास्कर
संवाददाता सुरेश कुमार पटेरिया
बूढ़ादीत में 'सफेदपोश' तस्करों ने उजाड़ा जंगल, कुंभकर्णी नींद में सोया कोटा का वन विभाग!
खाकी की खामोशी या तस्करों से सांठगांठ? ग्रामीणों के आक्रोश के बाद भी 'पिंजरे' से बाहर नहीं निकल रहे अफसर।
कोटा ग्रामीण क्षेत्र की ग्राम पंचायत कोटड़ादीप सिंह इन दिनों वन माफियाओं के लिए 'सोने की खदान' बन गई है। यहाँ प्रशासन और वन विभाग की नाक के नीचे बेशकीमती लकड़ियों की तस्करी का ऐसा काला खेल चल रहा है, जिसने पर्यावरण रक्षकों की साख पर बट्टा लगा दिया है। हैरानी की बात यह है कि ग्रामीण चीख-चीख कर शिकायतें कर रहे हैं, लेकिन वन विभाग के अफसरों ने आँखों पर 'लापरवाही की पट्टी' बांध रखी है।
ग्राउंड रिपोर्ट: रात में गूंजते हैं आरे, सुबह गायब मिलते हैं पेड़अखबार की पड़ताल में सामने आया कि कोटड़ादीप सिंह और आसपास के बूढ़ादीत क्षेत्र में तस्करों का नेटवर्क इतना मजबूत है कि उन्हें किसी का डर नहीं। रात के अंधेरे में दर्जनों ट्रैक्टर और लोडिंग गाड़ियाँ अवैध लकड़ियों से भरकर निकलती हैं। ग्रामीणों का सवाल है कि— "क्या ये गाड़ियाँ हवा में उड़कर जाती हैं? रास्ते में पड़ने वाली नाकाबंदी और वन चौकियाँ उस वक्त कहाँ सोई रहती हैं?"विभागीय पोल खोल: तीन तीखे सवाल जिनका जवाब विभाग के पास नहीं!
मौन स्वीकृति का 'हिसाब' क्या है?: बार-बार शिकायत के बाद भी मौके पर दबिश क्यों नहीं दी जाती? क्या तस्करों को छापेमारी की खबर पहले ही दे दी जाती है?
मुखबिर तंत्र या तस्करों का तंत्र?: विभाग का इंटेलिजेंस फेल है या फिर विभाग के ही कुछ लोग तस्करों के 'पेरोल' पर काम कर रहे हैं?सरकारी संपत्ति की लूट का जिम्मेदार कौन?:
जंगल की जमीन से कट रहे पेड़ों का हर्जाना क्या उन अफसरों की सैलरी से वसूला जाएगा जो ऑफिस में बैठकर एयर कंडीशनर की हवा खा रहे हैं?