लोकतंत्र में आवाज दबाना संविधान का उल्लंघन: *डॉ. सुरेश चंद शर्मा*
By Shubh Bhaskar ·
29 Apr 2026 ·
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लोकतंत्र में आवाज दबाना संविधान का उल्लंघन: *डॉ. सुरेश चंद शर्मा*
*नागपाल शर्मा माचाड़ी की रिपोर्ट*
(माचाड़ीअलवर):- नई दिल्ली- दिल्ली रविवार को ‘यूजीसी काला कानून वापस लो’ की मांग को लेकर जंतर-मंतर पर प्रस्तावित शांतिपूर्ण प्रदर्शन को लेकर विवाद खड़ा हो गया। राष्ट्रीय सवर्ण दल के प्रदेश प्रभारी व सर्व समाज जागृति संघ के राष्ट्रीय संस्थापक डॉ. सुरेश चंद शर्मा ने आरोप लगाया कि पूर्व अनुमति होने के बावजूद पुलिस ने प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी और उन्हें कार्यक्रम स्थल खाली करने के लिए दबाव बनाया।
डॉ. शर्मा ने बताया कि वे सर्व समाज जागृति संघ के राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी नागपाल शर्मा के साथ जंतर-मंतर पहुंचे थे और अपने साथियों का इंतजार कर रहे थे। इसी दौरान बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी मौके पर पहुंचे और प्रदर्शन की अनुमति न होने का हवाला देते हुए उन्हें वहां से हटने के लिए कहा। पुलिस ने चेतावनी दी कि आदेश का पालन नहीं करने पर कानूनी कार्यवाही करते हुए गिरफ्तारी की जा सकती है।
उन्होंने कहा कि उन्होंने अधिकारियों को समझाने का प्रयास किया कि उनका प्रदर्शन पूरी तरह शांतिपूर्ण है और इसका उद्देश्य सरकार का ध्यान यूजीसी के कथित काले कानून की ओर आकर्षित करना है, लेकिन पुलिस ने इसे मानने से इनकार कर दिया।
डॉ. शर्मा ने मीडिया से अपील करते हुए कहा कि इस तरह की घटनाओं को प्रमुखता से उठाया जाना चाहिए, क्योंकि लोकतंत्र में सभा, संवाद और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता नागरिकों का मूल अधिकार है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार या सत्ताधारी दल जवाबदेही से बचने के लिए आवाजों को दबाने का प्रयास कर रहे हैं।
उन्होंने कहा, “आवाज दबाने से समाज में असंतोष बढ़ता है, जो आगे चलकर विद्रोह का रूप ले सकता है। लोकतंत्र में आवाज दबाना एक कैंसर की तरह है, जो व्यवस्था को अंदर से कमजोर करता है।”
अंत में डॉ. सुरेश चंद शर्मा ने प्रधानमंत्री से मांग की कि यूजीसी के इस कथित काले कानून को तुरंत वापस लिया जाए और सवर्ण समाज की चिंताओं पर भी ध्यान दिया जाए।