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अहंकार त्याग और निर्वैरता का संदेश देती है संत दादू दयाल महाराज की वाणी।

By Shubh Bhaskar · 28 Apr 2026 · 8 views
अहंकार त्याग और निर्वैरता का संदेश देती है संत दादू दयाल महाराज की वाणी।

*नागपाल शर्मा माचाड़ी की रिपोर्ट*

(माचाड़ीअलवर):- राजस्थान राजस्थान की संत परंपरा के महान संत दादू दयाल की वाणी आज भी समाज को सही मार्ग दिखाने का कार्य कर रही है। उनकी प्रसिद्ध साखी—
“आपा मेटे हरि भजै, तन मन तजै विकार।
निर्वैरी सब जीव सूं, दादू यहु मत सार।।”
मानव जीवन के मूल सिद्धांतों को सरल और सारगर्भित रूप में प्रस्तुत करती है।
इस साखी के माध्यम से संत दादू दयाल बताते हैं कि जो व्यक्ति अपने अहंकार का त्याग कर ईश्वर का भजन करता है और तन-मन के विकारों जैसे काम, क्रोध, लोभ, मोह एवं ईर्ष्या को त्याग देता है, वही सच्चे मार्ग पर अग्रसर होता है। साथ ही वे प्रत्येक जीव के प्रति निर्वैर भाव रखने का संदेश देते हैं, अर्थात किसी से शत्रुता न रखना ही जीवन की श्रेष्ठ साधना है।
संत दादू दयाल के अनुसार सच्ची भक्ति केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आचरण की शुद्धता, विनम्रता और सभी प्राणियों के प्रति प्रेम भाव में निहित है। उनका मानना है कि अहंकार रहित जीवन और सार्वभौमिक प्रेम ही ईश्वर प्राप्ति का सर्वोत्तम मार्ग है।
यह साखी आज के समय में भी समाज को आपसी भाईचारे, प्रेम और सद्भाव के साथ जीवन जीने की प्रेरणा देती है।
इस संबंध में ठिकाना गंगाबाग के महंत प्रकाश दास महाराज के उत्तराधिकारी उमाशंकर दास स्वामी ने जानकारी देते हुए बताया कि संत दादू दयाल की शिक्षाएं आज भी जनमानस के लिए प्रेरणास्रोत बनी हुई हैं। यह जानकारी श्रमजीवी पत्रकार संघ के तहसील उपाध्यक्ष नागपाल शर्मा, माचाड़ी को उमाशंकर दास स्वामी द्वारा जानकारी प्रदान की गई।

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