दिल्ली विश्वविद्यालय के दयाल सिंह सांध्य महाविद्यालय में राष्ट्रीय सेमिनार का सफल आयोजन।
By Shubh Bhaskar ·
25 Mar 2026 ·
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दिल्ली विश्वविद्यालय के दयाल सिंह सांध्य महाविद्यालय में राष्ट्रीय सेमिनार का सफल आयोजन।
*नागपाल शर्मा माचाड़ी की रिपोर्ट*
(माचाड़ीअलवर):- नई दिल्ली- दिल्ली- विश्वविद्यालय के दयाल सिंह सांध्य महाविद्यालय में 23 व 24 मार्च 2026 को सेमिनार हॉल में दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी (National Seminar) का भव्य आयोजन किया गया। यह आयोजन महाविद्यालय एवं भारतीय सामाजिक विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICSSR) के संयुक्त तत्वावधान में संपन्न हुआ।
राष्ट्रीय सेमिनार के संयोजक सहायक प्रोफेसर डॉ. श्यामसुंदर मीना लक्ष्मणगढ़ (अलवर) ने वाट्सएप द्वारा राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी नागपाल शर्मा माचाड़ी को जानकारी देते हुए बताया कि उद्घाटन सत्र में महाविद्यालय की प्राचार्या प्रो. (डॉ.) भावना पांडे, कॉलेज के चेयरमैन एवं पूर्व कुलपति डी.एस. चौहान, मुख्य वक्ता प्रो. अनिरुद्ध देशपांडे (पूर्व विभागाध्यक्ष, इतिहास विभाग, डीयू) सहित प्रो. हेमंत मिश्रा, अशोक कुमार सिंह, इतिहासकार सूरज भान भारद्वाज, प्रसिद्ध लेखक व पूर्व आईपीएस हरिराम मीना, प्रो. यूथिका मिश्रा, डॉ. अमरजीत सिंह, जेएनयू से एसोसिएट प्रोफेसर गंगा सहाय मीना, बीएचयू से चिंतक लहरी राम मीना तथा जयपुर से डॉ. नेहा विजय सहित देशभर से आए सौ से अधिक विद्वानों ने सहभागिता की।
सेमिनार का मुख्य विषय “लोकभाषा में अभिव्यक्ति : भारत के सांस्कृतिक व सामाजिक इतिहास की खोज” रहा, जिस पर वक्ताओं ने अपने शोधपरक विचार प्रस्तुत किए।
समापन समारोह में मुख्य वक्ता के रूप में प्रसिद्ध लेखक प्रो. डी.सी. चौबे ने “बृहत्तर भारत” विषय पर अपने विचार रखे और इसे देश के लिए महत्वपूर्ण वैचारिक दिशा बताया। इस अवसर पर प्रो. पी.आर. थापर, प्रो. माधुरी चावला, प्रो. बी. विश्वास, प्रो. साजिद खान, प्रो. शिवानी सिंह, प्रो. ज्ञानेन्द्र सहित इतिहास विभाग के इंचार्ज विजयंत सिंह, प्रीतम गुप्ता, महेश दीपक, वीरेन्द्र, रूबी सिंह, शशि शेखर, नम्रता सिंह एवं अन्य संकाय सदस्यों और स्टाफ ने सक्रिय भूमिका निभाई।
कार्यक्रम में देशभर से आए लगभग 135 विद्वान प्रतिभागियों सहित सैकड़ों श्रोताओं ने भाग लिया। आयोजन के दौरान प्रस्तुत शोधपत्रों को शीघ्र ही पुस्तक के रूप में प्रकाशित करने की योजना भी बनाई गई है।
समापन अवसर पर डॉ. श्यामसुंदर मीना लक्ष्मणगढ़ (अलवर) एवं विजयंत सिंह ने कार्यक्रम को सफल बनाने में प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से सहयोग करने वाले सभी विद्वानों, अतिथियों एवं स्टाफ का आभार व्यक्त किया।