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दांडी यात्रा के स्मरणीय दिवस पर सत्याग्रहियों को कोटि-कोटि नमन – *डॉ. सुरेश चंद शर्मा*

By Shubh Bhaskar · 13 Mar 2026 · 15 views
दांडी यात्रा के स्मरणीय दिवस पर सत्याग्रहियों को कोटि-कोटि नमन – *डॉ. सुरेश चंद शर्मा*

*नागपाल शर्मा माचाड़ी की रिपोर्ट*

(माचाड़ीअलवर):-जयपुर- जयपुर सर्व समाज जागृति संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष व बृजवासी गौ रक्षक सेना भारत संघ के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष ओर शिव शक्ति संगठन के प्रदेश अध्यक्ष डॉ सुरेश चंद शर्मा ने राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी नागपाल शर्मा माचाड़ी को जानकारी देते हुए बताया कि 12 मार्च भारत के इतिहास का एक अत्यंत ऐतिहासिक और प्रेरणादायक दिवस माना जाता है। इसी दिन 12 मार्च 1930 को राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने साबरमती आश्रम से 78 सत्याग्रहियों के साथ ब्रिटिश शासन की अन्यायपूर्ण नीतियों और नमक कानून के विरोध में ऐतिहासिक दांडी मार्च की शुरुआत की थी।
उस समय ब्रिटिश सरकार ने नमक के उत्पादन और बिक्री पर एकाधिकार स्थापित कर रखा था तथा नमक पर भारी कर लगाया जाता था। इस अन्याय के विरोध में गांधीजी ने अपने साथियों के साथ लगभग 358 किलोमीटर की पदयात्रा करते हुए 24 दिनों में दांडी पहुंचकर ०6 अप्रैल 1930 को समुद्र तट पर नमक बनाकर ब्रिटिश कानून को तोड़ा।
इस ऐतिहासिक यात्रा के दौरान देशभर में हजारों लोगों ने गांधीजी का समर्थन किया और स्वतंत्रता आंदोलन को नई ऊर्जा मिली। दांडी सत्याग्रह ने पूरे देश में आजादी की चेतना जगाने का कार्य किया।
डॉ. सुरेश चंद शर्मा ने कहा कि इस आंदोलन के बाद तत्कालीन वायसराय लॉर्ड इरविन के साथ समझौते के तहत भारतीयों को समुद्र से नमक बनाने का अधिकार प्राप्त हुआ। उन्होंने बताया कि मोतीलाल नेहरू ने गांधीजी की दांडी यात्रा की तुलना भगवान राम की लंका यात्रा से करते हुए कहा था कि जिस प्रकार रामचंद्र की लंका यात्रा ऐतिहासिक है, उसी प्रकार गांधीजी की दांडी यात्रा भी सदैव स्मरणीय रहेगी।
डॉ. शर्मा ने कहा कि दांडी आंदोलन केवल नमक कानून तोड़ने तक सीमित नहीं था, बल्कि यह देशवासियों में राष्ट्रभक्ति, साहस, संकल्प, सादगी और अहिंसक प्रतिरोध की भावना जगाने वाला एक बड़ा सविनय अवज्ञा आंदोलन था।
उन्होंने कहा कि दांडी सत्याग्रह से हमें यह सीख मिलती है कि अन्याय के खिलाफ साहस, संकल्प और अहिंसा के मार्ग पर चलकर ही स्वतंत्रता और स्वाभिमान की रक्षा की जा सकती है।
सर्व समाज जागृति संघ के संस्थापक अध्यक्ष डॉ. सुरेश चंद्र शर्मा ने कहा कि सवर्ण समाज ने यूजीसी एक्ट के विरोध में शांतिपूर्वक प्रदर्शन किया और पूरे देश में कहीं भी प्रदर्शनकारियों द्वारा तोड़फोड़ नहीं की गई। इसका प्रमाण सोशल मीडिया और समाचार पत्रों में स्पष्ट देखा जा सकता है।
उन्होंने सभी से अपील करते हुए कहा कि आंदोलन चाहे कोई भी हो, उसे शांतिपूर्ण ढंग से करना चाहिए और राष्ट्र की संपत्ति को नुकसान नहीं पहुंचाना चाहिए।

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